Bhopal Drug Case: मेफेड्रोन ड्रग्स मामले में आरोपियों को बड़ा झटका; हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत, संगठित गिरोह का हुआ खुलासा

भोपाल मेफेड्रोन ड्रग्स मामला: हाई कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की। 61 किलो लिक्विड ड्रग्स की हुई थी बरामदगी।

Jun 23, 2026 - 10:24
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Bhopal Drug Case: मेफेड्रोन ड्रग्स मामले में आरोपियों को बड़ा झटका; हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत, संगठित गिरोह का हुआ खुलासा

जबलपुर। भोपाल में मेफेड्रोन ड्रग्स बनाने और तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार महिला सहित तीन आरोपियों की जमानत याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति से मामूली नशीला पदार्थ मिलने का नहीं, बल्कि एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध समाज को खोखला करते हैं, इसलिए आरोपी राहत के हकदार नहीं हैं।

🧪 लैब रिपोर्ट में हुआ खतरनाक ड्रग्स का खुलासा

आरोपियों की ओर से तर्क दिया गया था कि शुरुआती रिपोर्ट में ड्रग्स की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन बाद में नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी, गांधीनगर की रिपोर्ट में मेफेड्रोन और खतरनाक केमिकल '2-ब्रोमो 4-मिथाइल प्रोपियोफेनोन' की पुष्टि हुई। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने जीएसटी और फर्म के नाम का गलत इस्तेमाल कर हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एसीटोन जैसे प्रतिबंधित रसायन जुटाए थे, जिनका उपयोग मेफेड्रोन बनाने में किया जा रहा था।

🔗 कई राज्यों में फैला था ड्रग्स का जाल

जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सलीम डोला (फरार) है। इसने मेफेड्रोन बनाने के लिए एक क्वालिफाइड केमिस्ट को काम पर रखा था। यह पूरा नेटवर्क भोपाल, उत्तर प्रदेश, मुंबई, गुजरात और महाराष्ट्र तक फैला था। एक महिला आरोपी पर हवाला के जरिए नकद लेनदेन का आरोप है। आरोपियों के बीच व्हाट्सएप चैट और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि पूरी सप्लाई चेन एक समन्वित तरीके से काम कर रही थी।

⚖️ कोर्ट का सख्त संदेश: अपराध गंभीर है

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि आरोपियों का ड्रग्स के उत्पादन और तस्करी से सीधा संबंध है। कोर्ट ने कहा, "ड्रग तस्करी और नशीली दवाओं का अवैध उत्पादन बहुत गंभीर अपराध है। ये न केवल समाज के ताने-बाने को नष्ट करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ियों को भी बर्बाद कर देते हैं।" ठोस सबूतों और गंभीर अपराध की प्रकृति को देखते हुए हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाकर्ताओं की जमानत अर्जी निरस्त कर दी है।

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