Brain Health Research: क्या दिमाग की सूजन ही है अल्जाइमर और पार्किंसन की जड़? सागर यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने साझा की नई रिसर्च
अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों की मुख्य वजह दिमाग की सूजन (इन्फ्लेमेशन) है। सागर यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च में इलाज की नई संभावनाओं पर चर्चा की गई।
सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर यूनिवर्सिटी) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न्यूरोलॉजिकल विकारों पर एक महत्वपूर्ण शोध साझा किया गया। दिल्ली यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. शशांक मौर्य ने बताया कि अल्जाइमर, पार्किंसन और याददाश्त से जुड़ी अन्य समस्याओं का सीधा संबंध मस्तिष्क में होने वाली सूजन (इन्फ्लेमेशन) से है। यदि इस सूजन को समय रहते नियंत्रित कर लिया जाए, तो इन गंभीर बीमारियों की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
🔬 इन्फ्लेमेशन और न्यूरोडीजेनेरेशन का संबंध
डॉ. मौर्य के अनुसार, मस्तिष्क में सूजन चाहे चोट (ट्रॉमा) की वजह से हो या बढ़ती उम्र के कारण, यह न्यूरॉन्स के क्षय (डिजेनेरेशन) को तेजी से बढ़ाती है। रिसर्च ग्रुप फिलहाल 'माइक्रोग्लियल' कोशिकाओं के नियमन पर काम कर रहा है। ये कोशिकाएं मस्तिष्क की प्रतिरक्षा प्रणाली की तरह काम करती हैं। उनका उद्देश्य इन कोशिकाओं को 'प्रो-इन्फ्लेमेटरी' (सूजन बढ़ाने वाली) अवस्था से 'न्यूरोप्रोटेक्टिव' (न्यूरॉन्स की रक्षा करने वाली) अवस्था में बदलना है, ताकि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को स्वस्थ रखा जा सके।
🛡️ एस्ट्रोसाइट्स और माइक्रोग्लियल कोशिकाओं की भूमिका
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली तीन मुख्य इकाइयों पर टिकी है: न्यूरॉन्स, एस्ट्रोसाइट्स और माइक्रोग्लियल कोशिकाएं। जहाँ न्यूरॉन्स संकेतों का आदान-प्रदान करते हैं, वहीं एस्ट्रोसाइट्स उन्हें पोषण और संरचनात्मक सहारा देते हैं। शोध में बताया गया है कि यदि हम एस्ट्रोसाइट्स की सहायक क्षमता को बढ़ा सकें और माइक्रोग्लिया के कार्यों को संतुलित कर सकें, तो न्यूरॉन्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए अब जीन-थेरेपी और नई दवाओं पर संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
🌐 वैश्विक स्तर पर शोध की दिशा
दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में अब न्यूरॉन्स, एस्ट्रोसाइट्स और माइक्रोग्लिया के आपसी संबंधों को समझने पर जोर दिया जा रहा है। उन्नत इमेजिंग तकनीक और 'जीन-संपादन' (Gene Editing) के जरिए वैज्ञानिक इस कोशिश में हैं कि कैसे दिमाग की सूजन को कम किया जाए और उम्र के साथ होने वाली गिरावट को रोका जाए। यह शोध भविष्य में दिमागी बीमारियों के इलाज के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।
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