Seoni Jumbo Sitaphal Gets GI Tag: अब दुनिया चखेगी सिवनी के जंबो सीताफल का जादू; मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
सिवनी के मशहूर जंबो सीताफल को मिला प्रतिष्ठित जीआई (GI) टैग। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलेगी पहचान, किसानों की आय बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
सिवनी। अपने विशाल आकार और अनोखे स्वाद के लिए देशभर में विख्यात सिवनी के 'जंबो सीताफल' ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब इस विशेष उत्पाद को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। इस मान्यता के साथ ही सिवनी का यह सीताफल अब न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान स्थापित करेगा, जिससे स्थानीय किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम मिल सकेगा।
⚖️ वजन और स्वाद में है बेजोड़
सिवनी का जंबो सीताफल अपने बड़े आकार के लिए जाना जाता है। एक फल का औसत वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है, जबकि भूतबंधानी क्षेत्र में तो ऐसे भी फल पाए जाते हैं जिनका वजन 800 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक होता है। जीआई टैग मिलने से अब इसकी विशिष्टता सुरक्षित हो गई है और इसके नाम का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। उद्यानिकी विभाग के प्रयासों से वर्ष 2023 में इसके लिए आवेदन किया गया था, जिसका सुखद परिणाम अब सामने आया है।
📈 किसानों की आय और रोजगार में होगी वृद्धि
जिले में लगभग 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती की जा रही है, जिससे प्रतिवर्ष करीब 6090 मीट्रिक टन का उत्पादन होता है। कलेक्टर नेहा मीना ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सिवनी की कृषि विरासत को सशक्त बनाने वाला कदम है। इस टैग से सीताफल की प्रोसेसिंग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
🥛 प्रसंस्करण (Processing) से बढ़ेगी वैल्यू
सिवनी का सीताफल दिल्ली, मुंबई, नागपुर और रायपुर जैसे बड़े महानगरों में पहले से ही लोकप्रिय है। अब इसके पल्प से बनने वाली आइसक्रीम, रबड़ी, लस्सी और शेक जैसे उत्पादों की बाजार में मांग और बढ़ेगी। जिले में सीताफल उत्पादकों के लिए एफपीओ (FPO) का गठन किया गया है और तीन पल्प प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किए गए हैं, जो इस फल की आर्थिक वैल्यू को और अधिक बढ़ा रहे हैं।
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