बारिश की बेरुखी और फसलें तबाह, बड़वानी के पाटी क्षेत्र से गुजरात पलायन करने को मजबूर ग्रामीण
बड़वानी के पाटी क्षेत्र में सूखे और रोजगार के अभाव के कारण ग्रामीणों का गुजरात पलायन शुरू। घर-बार और बच्चों की पढ़ाई छोड़कर मजदूरी की तलाश में जाने को मजबूर।
बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले अंतर्गत पाटी क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की भारी बेरुखी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के समुचित साधन उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीण आबादी के सामने आजीविका का भीषण संकट खड़ा हो गया है।
पहाड़ी और पथरीली जमीन पर बोई गई फसलें बारिश के अभाव में पूरी तरह सूखकर नष्ट हो चुकी हैं। खेती से मिलने वाले आय के मुख्य साधन के छिन जाने के बाद, अब ग्रामीण परिवार अपनी रोजी-रोटी की खातिर घर-बार छोड़कर पड़ोसी राज्य गुजरात की ओर बड़े पैमाने पर पलायन करने को विवश हैं। पाटी ब्लॉक के बोकराटा, शिवनी, झरार और कंड्रा सहित दर्जनों गांवों से परिवार के परिवार गुजरात के लिए रवाना हो रहे हैं।
🎒 बस स्टैंडों पर सामान की गठरियों संग दिख रहा पलायन का मंजर: बच्चों की शिक्षा हो रही बुरी तरह प्रभावित
पलायन की यह भयावह स्थिति क्षेत्र के बस स्टैंडों और मुख्य सड़कों पर साफ देखी जा सकती है।
सुबह से ही ग्रामीण अपने गृहस्थी का सामान, बिस्तर और कपड़ों की गठरियां लेकर वाहनों के इंतजार में खड़े दिखाई देते हैं। पिकअप, ईको और अन्य निजी वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरकर ग्रामीण गुजरात के लिए निकल रहे हैं। इस पलायन में सबसे चिंताजनक पक्ष मासूम बच्चों का है, जो अपने माता-पिता के साथ जाने को मजबूर हैं। शैक्षणिक सत्र के बीच में ही गांव छोड़ने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो रही है।
🗣️ 'पेट भरने का संकट हो तो पढ़ाई कैसे कराएं': पीड़ित ग्रामीणों की आपबीती और आर्थिक तंगी का दबाव
ग्राम कंड्रा निवासी मजदूर जगदीश ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि "बारिश न होने से फसल पूरी तरह तबाह हो चुकी है। घर में खाने के लिए अनाज का एक दाना नहीं बचा और गांव में कोई काम-धंधा नहीं है।
परिवार का पेट पालने के लिए गुजरात जाना हमारी मजबूरी है। हम जानते हैं कि बच्चों की शिक्षा जरूरी है, लेकिन जब भूख मिटाने का संकट हो तो हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।" ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खेती के लिए दुकानदारों से लिया गया कर्ज चुकाने और दैनिक राशन का खर्च चलाने के लिए तत्काल नकदी की जरूरत है, जो केवल गुजरात में मजदूरी से ही संभव दिख रही है।
🚚 असुरक्षित वाहनों में सफर करने को मजबूर: भोंगर्या हाट के समय फरवरी में होगी वापसी
ग्रामीणों के अनुसार, केवल शुक्रवार को ही तीन वाहनों में करीब 20 से अधिक लोग परिवार सहित गुजरात के लिए रवाना हुए।
गुजरात में मजदूरी का नया सीजन शुरू होने के कारण यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है। पलायन कर रहे मजदूर अब आगामी 'भोंगर्या हाट' के अवसर पर फरवरी माह में ही वापस लौटेंगे। इस लंबी अवधि के कारण कई गांवों में ताले लटके नजर आ रहे हैं। वहीं, क्षमता से अधिक सवारियां और सामान लादकर लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का भी बड़ा खतरा बना हुआ है।
🏗️ स्थानीय स्तर पर मनरेगा कार्य शुरू करने की मांग: राहत न मिलने पर और भयावह होगी स्थिति
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रदेश शासन और जिला प्रशासन से पाटी ब्लॉक के प्रभावित गांवों की स्थिति को संज्ञान में लेकर तत्काल राहत कार्य चलाने की मांग की है।
उनकी मांग है कि गांवों में मनरेगा (MGNREGA) के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाए, मजदूरों को समय पर नियमित मजदूरी दी जाए तथा अत्यंत जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न व राहत सामग्री वितरित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते स्थानीय स्तर पर काम का प्रबंध नहीं किया, तो आने वाले दिनों में पलायन का यह आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा।
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