UCC के खिलाफ 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, मध्य प्रदेश से जुटेंगे लोग
भोपाल में AIMPLB की बैठक में UCC के विरोध का खाका तैयार हुआ। 17 सितंबर को दिल्ली जंतर-मंतर प्रदर्शन में MP से लोग शामिल होंगे। बोर्ड कोर्ट का रुख भी करेगा।
भोपाल। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की भोपाल में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के विरोध में 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर होने वाले देशव्यापी प्रदर्शन में मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
बैठक के समापन के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, "हम मध्य प्रदेश के नागरिकों और समुदाय के लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए 17 सितंबर को बड़ी तादाद में दिल्ली पहुंचकर इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शिरकत करें।"
उधर, शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी ने इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वितीयाधिवक्ता पूज्य गुरु गोलवलकर के यूसीसी पर दिए गए ऐतिहासिक वक्तव्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वयं गुरु गोलवलकर ने अपने एक प्रसिद्ध इंटरव्यू में स्पष्ट किया था कि भारत जैसे विविध संस्कृति वाले देश में यूसीसी (UCC) कानून की कोई आवश्यकता नहीं है।
📜 शहर काजी ने याद दिलाया गोलवलकर का 1972 का इंटरव्यू: 'यूसीसी की जरूरत नहीं'
भोपाल के शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी ने AIMPLB की बैठक के बाद मीडिया से औपचारिक बातचीत में आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर (गुरुजी) के 1972 में दिए गए एक साक्षात्कार का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि उस साक्षात्कार में गोलवलकर जी ने स्पष्ट कहा था कि भारत में यूसीसी जैसे किसी एकसमान कानून को जबरन लागू करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत की ताकत उसकी विविध धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है। मौलाना नदवी ने कहा कि यदि मुद्दा मुसलमानों के पर्सनल लॉ और शरीयत से जुड़े कानूनों का है, तो उसके बारे में सही और बेहतर पक्ष तो इस क्षेत्र के जानकार और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि ही रख सकते हैं। उन्होंने आम नागरिकों से 17 सितंबर को जंतर-मंतर पर आयोजित धरने में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए शामिल होने की अपील की।
⚖️ सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई की तैयारी: 'हम UCC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे'
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मीडिया से बातचीत में बोर्ड का रुख पूरी तरह साफ किया।
आरिफ मसूद ने कहा, "हमने यूसीसी बिल को लेकर अपना रुख पहले दिन से स्पष्ट कर रखा है। हम इस बिल को स्वीकार नहीं करेंगे और इसे रद्द करवाने के लिए संविधान के तहत मिले सभी लोकतांत्रिक व कानूनी अधिकारों का उपयोग करेंगे। हम इस मुद्दे पर बहुत जल्द अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, हमारी याचिका पूरी तरह तैयार है।"
मसूद ने आगे कहा कि 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में मध्य प्रदेश से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी पांचों सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। मसूद ने आरोप लगाते हुए कहा, "कुछ राजनीतिक ताकतें देश के विविधतापूर्ण संविधान और व्यक्तिगत आजादी के ढांचे को कमजोर करना चाहती हैं, लेकिन हम देश के संविधान को बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।"
🗳️ 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य: केंद्रीय गृह मंत्री के बयान के बाद बढ़ी हलचल
भोपाल में संपन्न हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की इस आपात बैठक के बाद मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी और विधायक आरिफ मसूद ने संयुक्त प्रेस वार्ता में यूसीसी से जुड़ी बोर्ड की भावी रणनीति साझा की।
उन्होंने बताया कि सड़क पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से लेकर शीर्ष अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ने तक बोर्ड पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बयान में कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित और एनडीए (NDA) गठबंधन की राज्य सरकारों वाले 21 राज्यों में 2029 तक यूसीसी बिल को चरणबद्ध तरीके से लागू कर दिया जाएगा। गृह मंत्री के इस बयान के बाद से ही देशभर में यूसीसी को लेकर सियासी और सामाजिक बहस एक बार फिर काफी तेज हो गई है।
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