पीपीएच से नहीं होगी प्रसूताओं की मौत; एमपी के 1500+ लेबर रूम में मापा जाएगा वास्तविक रक्तस्राव
मध्य प्रदेश के अस्पतालों में प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) से होने वाली मातृ मृत्यु को रोकने के लिए 1500 से अधिक लेबर रूम में ऑब्स्ट्रेटिक ड्रेप बैग दिए जाएंगे।
भोपाल। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में प्रसव (डिलीवरी) के दौरान होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव यानी 'पोस्ट पार्टम हैमरेज' (PPH) के कारण होने वाली मातृ मृत्यु को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है।
विभाग अब राज्य के सभी लेबर रूम (प्रसव कक्षों) में 'ऑब्स्ट्रेटिक ड्रेप' (प्रसूति के दौरान रक्तस्राव मापने वाला विशेष बैग) उपलब्ध कराने जा रहा है। इस आधुनिक बैग के माध्यम से प्रसव के दौरान बहने वाले खून की मात्रा का केवल अनुमान लगाने के बजाय उसकी वास्तविक माप की जा सकेगी। आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) वर्ष 2020-22 के दौरान प्रति एक लाख प्रसूताओं पर 159 दर्ज किया गया था।
🩸 अत्यधिक ब्लीडिंग और एनीमिया बने बड़ी चुनौती: समय पर इलाज से बच सकेगी जान
उल्लेखनीय है कि पोस्ट पार्टम हैमरेज (PPH) दुनियाभर में मातृ मृत्यु के प्रमुख और सबसे संवेदनशील कारणों में से एक है।
भारत में लगभग 19.9 प्रतिशत प्रसूताओं की मृत्यु इसी अत्यधिक रक्तस्राव के कारण होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में एनीमिया (खून की कमी) भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। 'नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे' (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 15 से 49 वर्ष की 54.7 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ऐसी स्थिति में प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव की सटीक और त्वरित पहचान महिलाओं का जीवन बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
💉 प्रदेश के 1500 से अधिक प्रसव कक्षों में होगी आपूर्ति: कारपोरेशन के जरिए होगी खरीदारी
ऑब्स्ट्रेटिक ड्रेप बैग में एकत्र होने वाले रक्त की सटीक मात्रा से डॉक्टर PPH की स्थिति को समय रहते तुरंत पहचान सकेंगे और तत्काल जीवन रक्षक उपचार (जैसे इमरजेंसी ब्लड ट्रांसफ्यूजन) शुरू कर पाएंगे।
मध्य प्रदेश में 1500 से अधिक लेबर रूम हैं, जिनमें चरणबद्ध (Phased) तरीके से ये विशेष बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। इन बैगों की खरीदी 'मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन' (MPPHSC) के माध्यम से की जाएगी।
🏠 संस्थागत प्रसव बढ़ाना अभी भी चुनौती: 10 प्रतिशत प्रसव अब भी हो रहे घरों में
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जो प्रसव अभी भी अस्पतालों के बजाय घरों में कराए जा रहे हैं, उनमें PPH से जान जाने का जोखिम लगातार बना रहेगा।
'राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण' (NFHS-6) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) का आंकड़ा 89.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसका अर्थ है कि लगभग 10 प्रतिशत प्रसव अभी भी घरों में असुरक्षित माहौल में हो रहे हैं, जिन्हें अस्पताल तक लाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)