Medical Education in MP: शहडोल मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी; छात्रों का भविष्य अंधकार में, मरीज परेशान

शहडोल के शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में 35% से ज्यादा पद खाली। छात्रों को यूट्यूब से करनी पड़ रही पढ़ाई, मरीजों को नहीं मिल पा रहा बेहतर इलाज।

Jun 23, 2026 - 14:20
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Medical Education in MP: शहडोल मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी; छात्रों का भविष्य अंधकार में, मरीज परेशान

शहडोल। आदिवासियों के स्वास्थ्य का केंद्र माने जाने वाला शहडोल का 'शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज' इन दिनों खुद गंभीर संकट से जूझ रहा है। मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापक से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक के 35 प्रतिशत से ज्यादा पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। स्टाफ की कमी का सीधा असर यहाँ मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों और इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। हालत यह है कि छात्रों को पढ़ाई के लिए यूट्यूब और सेल्फ-स्टडी का सहारा लेना पड़ रहा है।

📊 रिक्त पदों का ब्यौरा: शिक्षकों के बिना भगवान भरोसे शिक्षा

मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक पदों की कमी छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रही है। यहाँ सहायक प्राध्यापक के 47 में से 26, सह प्राध्यापक के 31 में से 10 और प्राध्यापक के 24 में से 12 पद खाली हैं। जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ 82 में से 47 जूनियर और 60 में से 35 सीनियर रेजिडेंट के पद रिक्त हैं। शिक्षक न होने के कारण न केवल क्लासेज कम लग रही हैं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Training) भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

🩺 पैरामेडिकल और नर्सिंग सेवाओं का बुरा हाल

सिर्फ डॉक्टरों ही नहीं, बल्कि कॉलेज में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भी भारी कमी है। नर्सिंग ऑफिसर के 253 पदों में से 42 और नर्सिंग सिस्टर के 35 में से पूरे 35 पद खाली हैं। पैरामेडिकल के 162 में से 62 पदों के रिक्त होने से मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में लगातार कमी आ रही है। ऐसी स्थिति में कॉलेज का कोई भी संवर्ग ऐसा नहीं है जो पूरी तरह सक्रिय हो, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई है।

🚑 दूरदराज के मरीजों की उम्मीदों को झटका

शहडोल संभाग का इकलौता मेडिकल कॉलेज होने के नाते यहाँ केवल स्थानीय मरीज ही नहीं, बल्कि डिंडोरी, मंडला और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के मरीज भी उम्मीद लेकर आते हैं। कॉलेज के डीन डॉ. जीबी रामटेक का कहना है कि शासन को लगातार पत्राचार किया जा रहा है और भर्ती के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं। स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पदों को भरने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जब तक भर्तियाँ नहीं होतीं, तब तक छात्रों के कीमती समय और मरीजों की जान की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?

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