बुरहानपुर में केला कटाई के बाद प्लास्टिक कचरा छोड़ने वालों को चेतावनी; मंडी सचिव जारी करेंगे टोल-फ्री नंबर
बुरहानपुर केला मंडी प्रशासन ने खेतों में प्लास्टिक और फोम छोड़ने वाले व्यापारियों व ग्रुप संचालकों को सख्त चेतावनी दी है। उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई।
बुरहानपुर। मध्य प्रदेश की एकमात्र केला नीलामी मंडी बुरहानपुर जिले में स्थित है, जहां करीब 22 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में किसान केले की खेती करते हैं। इस विशाल उत्पादन के चलते क्षेत्र में दर्जनों केला ग्रुप संचालित होते हैं, वहीं बाहरी राज्यों के व्यापारी भी बड़ी संख्या में यहां से केला खरीदते हैं। इस कारोबार से हजारों व्यापारी और ग्रुप संचालक सीधे जुड़े हुए हैं। हालांकि, अक्सर किसानों के खेतों से केला कटाई के बाद पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली वेस्टेज पॉलीथिन और फोम को खेतों में ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। प्लास्टिक और फोम मिट्टी में मिलकर खेतों की उर्वरक क्षमता और फसल उत्पादन पर बुरा असर डाल रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए कृषि उपज मंडी समिति के सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी ने सभी केला ग्रुप संचालकों और पंजीकृत व्यापारियों को चेतावनी भरा आदेश जारी किया है।
🚚 खेतों में प्लास्टिक फोम फेंकने से घट रही मिट्टी की उर्वरता: मंडी सचिव ने दी सख्त हिदायत
बुरहानपुर से रोजाना 150 से अधिक गाड़ियां केला भरकर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजी जाती हैं।
केले की गाड़ियां लोड करने के दौरान निकलने वाले प्लास्टिक फोम और पॉलीथिन को व्यापारी खेतों में ही फेंक कर चले जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है और किसान बेहद चिंतित हैं। किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंडी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंडी सचिव ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों और ग्रुप संचालकों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, इस समस्या से निपटने और त्वरित शिकायत दर्ज कराने के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर भी जारी किया जा रहा है, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
🌍 बुरहानपुर के केले की मिठास के खाड़ी देश भी मुरीद: नवरात्रि में मांग और आवक बढ़ने की उम्मीद
गौरतलब है कि बुरहानपुर के केले की मिठास के न केवल देश में, बल्कि खाड़ी देशों (Gulf Countries) में भी लोग मुरीद हैं।
बुरहानपुर से विदेशों के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर केला सप्लाई किया जाता है। वर्तमान में केला नीलामी मंडी में रोजाना 100 से अधिक गाड़ियां बुक हो रही हैं। आगामी नवरात्रि पर्व को देखते हुए यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि नवरात्रि में व्रत-उपवास के कारण केले की मांग और भाव दोनों में उछाल आता है। आवक बढ़ने के साथ ही गाड़ियों में लोडिंग के दौरान प्लास्टिक कचरा फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है, जिसके लिए मंडी प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली है।
📜 नियम तोड़ने वालों के खिलाफ होगी दंडात्मक कार्रवाई: मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी
कृषि उपज मंडी समिति बुरहानपुर के सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि, "रोजाना बुरहानपुर से बड़ी मात्रा में केले की पैकिंग और परिवहन का कार्य होता है।
इस दौरान ठेकेदारों और व्यापारियों द्वारा खेतों में ही प्लास्टिक फोम व पॉलीथिन छोड़ दिया जाता है। यह प्लास्टिक मिट्टी में घुलकर खेतों की उर्वरक क्षमता और पैदावार को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रहा है। मंडी समिति ने सभी संबंधित केला ग्रुप संचालकों और पंजीकृत व्यापारियों को आधिकारिक पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि वे खेतों में प्लास्टिक कचरा कतई न फेंकें। यदि इसके बाद भी कोई व्यापारी या संचालक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"
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