बड़वानी में सरदार सरोवर विस्थापितों का छलका दर्द, एक ही प्लॉट के दो-दो दावेदार

बड़वानी में सरदार सरोवर परियोजना प्रभावितों के पुनर्वास में बड़ी गड़बड़ी। एक ही प्लॉट के दो-दो दावेदार सामने आने से विस्थापित 25 सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

Sep 15, 2026 - 20:40
0
बड़वानी में सरदार सरोवर विस्थापितों का छलका दर्द, एक ही प्लॉट के दो-दो दावेदार

बड़वानी। सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा कई दशक बीत जाने के बाद भी पूरी तरह सुलझता नजर नहीं आ रहा है। बड़वानी जिले में बनाए गए 39 पुनर्वास स्थलों पर आवासीय भूखंडों की रजिस्ट्री के लिए प्रशासन को लगभग 6,500 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इनमें से करीब 2,000 भूखंडों की रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन पुराने रिकॉर्ड और गलत आवंटन को लेकर अब भी कई गंभीर विवाद सामने आ रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति उन मामलों की है, जहां एक ही भूखंड का आवंटन दो अलग-अलग विस्थापित परिवारों के नाम पर कर दिया गया है।

हाल ही में कुकरा क्षेत्र की 'कस्बा बड़वानी क्रमांक-2' पुनर्वास बसाहट में ऐसा ही मामला सामने आया, जहां प्लॉट नंबर 128 को लेकर निर्मला बैरागी और बद्री पिता भीमा के बीच विवाद गहरा गया है। दोनों के पास एक ही भूखंड के सरकारी दस्तावेज होना पुनर्वास विभाग के रिकॉर्ड पर सवाल खड़े कर रहा है।

📜 'पहले 170 नंबर मिला, बाद में 128 का आवंटन': 14 सालों से हक के लिए भटक रही हैं निर्मला बैरागी

विस्थापित निर्मला बैरागी के अनुसार, उन्हें वर्ष 2012 में शुरुआत में प्लॉट नंबर 170 आवंटित किया गया था। लेकिन उस जगह पर पहले से किसी अन्य व्यक्ति का अतिक्रमण व निर्माण होने के कारण वर्ष 2020 में उन्हें वैकल्पिक रूप से प्लॉट नंबर 128 आवंटित किया गया।

जब उन्होंने शासकीय व्यवस्था के तहत भूखंड की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, तो पता चला कि इस प्लॉट का पट्टा बद्री पिता भीमा के नाम पर भी दर्ज है। निर्मला बैरागी का कहना है कि वे पिछले 14 वर्षों से अपने अधिकार और भूखंड की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन दो दावेदार होने के कारण प्रक्रिया अटक गई है।

🏠 'अधिकारी के मौखिक आदेश पर बनाया मकान, अब पट्टे के लिए परेशान': दूसरे दावेदार बद्री की आपबीती

इधर, इसी भूखंड के दूसरे दावेदार बद्री पिता भीमा का कहना है कि वे सरदार सरोवर परियोजना के 138 मीटर बैकवाटर क्षेत्र से प्रभावित हुए थे। नियमानुसार पुनर्वास प्रक्रिया के तहत उन्हें आवासीय प्लॉट मिलना तय था।

बद्री के मुताबिक, तत्कालीन भू-अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी के निर्देश पर उन्होंने वर्ष 2017 में संबंधित प्लॉट पर कब्जा लेकर अपना मकान बना लिया था। वे पिछले कई सालों से इसी मकान में सपरिवार रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक आधिकारिक पट्टा नहीं मिल सका है। उनके सरकारी रिकॉर्ड में भी इसी प्लॉट नंबर 128 का उल्लेख है, जिससे वे भी अपने पुनर्वास अधिकार को स्पष्ट करने के लिए सालों से भटक रहे हैं।

⏳ 25 साल से एक भूखंड के दो-दो दावेदार: बंजर जमीन और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर विस्थापित

प्रभावित विस्थापित परिवारों का कहना है कि यह केवल एक भूखंड का मामला नहीं है। जिले में 20 से अधिक ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां एक ही भूखंड पर दो-दो दावेदार मौजूद हैं। कई परिवार पिछले 25 वर्षों से पुनर्वास और मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कुछ विस्थापितों को गुजरात में पुनर्वास के नाम पर जमीन तो दी गई, लेकिन वह जमीन इतनी बंजर और खराब है कि उस पर खेती करना संभव नहीं है। वहीं कुकरा क्षेत्र के कई डूब प्रभावित परिवार आज भी पुराने और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा वर्ष 2018 में 142 मीटर डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवारों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

🔍 20 मामलों में एक ही प्लॉट पर दो पट्टों की शिकायतें: एसडीएम भूपेंद्र रावत ने दिए जांच के आदेश

बड़वानी के एसडीएम भूपेंद्र रावत ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि पुनर्वास स्थलों पर सभी पात्र विस्थापितों को प्लॉट देकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया लगातार जारी है। अब तक लगभग 2,000 रजिस्ट्रियां सफलतापूर्वक पूरी कराई जा चुकी हैं।

एसडीएम ने स्वीकार किया कि करीब 20 मामलों में एक ही भूखंड पर दो पट्टे या दोहरा आवंटन होने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन सभी मामलों की सूक्ष्मता से जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद वास्तविक पात्र व्यक्ति की रजिस्ट्री कराई जाएगी, जबकि दूसरे पात्र व्यक्ति को नियमानुसार अन्य उपयुक्त स्थान पर भूखंड देकर बसाया जाएगा।

💰 GRA के 60 लाख के आदेश के बाद भी नहीं मिला भुगतान: किसान हिम्मत सिंह का आरोप

कुकरा गांव के डूब प्रभावित किसान हिम्मत सिंह पिता मोहन सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA) ने उनके पक्ष में लगभग 60 लाख रुपये के मुआवजे का स्पष्ट आदेश दिया था।

इसके बावजूद भू-अर्जन एवं पुनर्वास विभाग इस आदेश को मानने से इनकार कर रहा है और उन्हें गुजरात का विस्थापित बता रहा है। हिम्मत सिंह का दावा है कि उन्होंने गुजरात सरकार से लिखित में प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर लिया है कि वहां उन्हें कोई पुनर्वास लाभ नहीं मिला है, फिर भी बड़वानी प्रशासन उन्हें राशि का भुगतान नहीं कर रहा है।

🏛️ बड़वानी विधायक राजन मंडलोई ने प्रशासन को घेरा: 'कागजों में सब ठीक, जमीन पर विस्थापित परेशान'

बड़वानी विधायक राजन मंडलोई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरदार सरोवर विस्थापितों का अब तक पूर्ण और पारदर्शी पुनर्वास नहीं हो सका है। एक ही प्लॉट दो अलग-अलग लोगों को दिए जाने से अव्यवस्था का माहौल है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई विस्थापितों को 5.80 लाख रुपये और 60 लाख रुपये के घोषित पुनर्वास पैकेज का लाभ आज तक नहीं मिला है। विधायक ने कहा कि प्रशासन केवल कागजी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज रहा है, जबकि अधिकारियों को मौके पर जाकर विस्थापितों की समस्याओं का त्वरित और स्थायी समाधान करना चाहिए।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User