AI Health Revolution in MP: महाराष्ट्र के बाद अब मध्यप्रदेश में एआई आधारित अस्पतालों की शुरुआत; उज्जैन बनेगा 'मेडिकल हब'

मध्यप्रदेश के अस्पतालों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का होगा इस्तेमाल। IIT इंदौर के सहयोग से उज्जैन में बनेगा डीपटेक सेंटर। जानें कैसे बदलेगी स्वास्थ्य सेवा।

Jun 23, 2026 - 16:51
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AI Health Revolution in MP: महाराष्ट्र के बाद अब मध्यप्रदेश में एआई आधारित अस्पतालों की शुरुआत; उज्जैन बनेगा 'मेडिकल हब'

उज्जैन। स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र की तर्ज पर अब राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ-साथ इमेजिंग सेंटरों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत MRI, CT Scan और X-RAY जैसी जांचें AI तकनीक से होंगी, जिससे बीमारियों की पहचान अधिक सटीक और त्वरित हो सकेगी।

🚀 IIT इंदौर और उज्जैन का सहयोग: डीपटेक रिसर्च सेंटर की सौगात

उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के अनुसार, सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों के साथ-साथ उज्जैन को 'साइंस एंड इनोवेशन' का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर IIT इंदौर के सहयोग से उज्जैन में एक 'डीपटेक रिसर्च एंड डिस्कवरी सेंटर' स्थापित किया जा रहा है। यह सेंटर मध्यप्रदेश की चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

🩺 एआई तकनीक के फायदे: बीमारियों की जल्दी पहचान

AI आधारित हेल्थ सिस्टम से कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और हड्डियों के फ्रैक्चर का पता लगाना अब काफी आसान हो जाएगा। एआई मशीनों द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट से डॉक्टरों को बीमारी को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था के मुख्य लाभ:

  • समय की बचत: रिपोर्ट जल्द तैयार होने से मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा।

  • सटीक डायग्नोसिस: डॉक्टरों पर दबाव कम होगा और मानवीय चूक की संभावना नगण्य होगी।

  • ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ: छोटे शहरों और ग्रामीण अंचल के मरीजों को भी विश्वस्तरीय जांच की सुविधा मिलेगी।

📑 मुख्यमंत्री का विजन: सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE)

हाल ही में भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उज्जैन में 'मेडी-सिटी' और 'साइंस-सिटी' के साथ-साथ मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन के लिए एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना की जाए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेंद्रन और आईआईटी इंदौर की टीम इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लगातार कार्य कर रही है, जो भविष्य में मध्यप्रदेश की पूरी चिकित्सा व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान करेगी।

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