मां-बहन की गालियों के खिलाफ सागर की वंदना गुप्ता की अनूठी मुहिम, 10 साल की मेहनत लाई रंग

सागर की समाजसेवी डॉ. वंदना गुप्ता की गालियों के खिलाफ 'वैचारिक स्वच्छता अभियान' अब मध्य प्रदेश सरकार के कई विभागों और स्कूलों में लागू हो गया है।

Sep 05, 2026 - 19:06
0
मां-बहन की गालियों के खिलाफ सागर की वंदना गुप्ता की अनूठी मुहिम, 10 साल की मेहनत लाई रंग

समाज में सरेआम मां-बहन की गालियों के उपयोग और इसके बढ़ते चलन के खिलाफ सागर की साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. वंदना गुप्ता ने एक बड़ी वैचारिक जंग छेड़ी है। बनारस में कॉलेज के दिनों से ही गालियों का विरोध करने वाली वंदना गुप्ता ने साल 2017-18 से इसे औपचारिक रूप देते हुए 'वैचारिक स्वच्छता अभियान' की शुरुआत की थी। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से लेकर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तक लगातार पत्राचार किया। उनकी इस मेहनत का परिणाम यह है कि अब मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान से जुड़कर अपने संस्थानों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है।

🏫 कॉलेज के दिनों से शुरू हुआ विरोध, 17 सितंबर को मनाया जाता है 'नो एब्यूज डे'

डॉ. वंदना गुप्ता बताती हैं कि जब वह वाराणसी में पढ़ाई कर रही थीं, तभी से उन्होंने लोगों को मां-बहन की गालियां देते हुए टोकना शुरू कर दिया था। बाद में सागर आने के बाद जब वह कैंट बोर्ड की स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर बनीं, तब उनके मन में विचार आया कि कार्यालयों की सफाई के साथ-साथ लोगों के विचारों में शुद्धता होना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने 17 सितंबर 2019 से 'नो एब्यूज डे' (No Abuse Day) मनाने की शुरुआत की। पिछले 10 सालों में उन्होंने स्कूल, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सेमिनार आयोजित कर जन-जागरूकता फैलाई, जिसके चलते आज केंद्र और राज्य स्तर पर इस अभियान को गंभीरता से लिया जा रहा है।

📋 स्कूलों और आंगनबाड़ियों में बच्चों को दिलाई जा रही है शपथ, क्यूआर कोड से जुड़ रहे लोग

इस अभियान के तहत अब सागर संभाग के स्कूल शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। स्कूलों में प्रार्थना के बाद बच्चों को यह संकल्प दिलाया जा रहा है कि वे कभी किसी को मां-बहन की गालियां नहीं देंगे। इसके अलावा, परिसरों में 'नो एब्यूज' के बोर्ड लगाए जा रहे हैं और क्यूआर कोड के जरिए सर्वे फॉर्म तैयार किया गया है, ताकि लोग इस विषय की गंभीरता को समझ सकें। 17 सितंबर को मनाए जाने वाले 'नो एब्यूज डे' के जरिए समाज में वैचारिक शुद्धता लाने के प्रयास लगातार तेज किए जा रहे हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User