फीस विवाद में छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लग सकता; हाईकोर्ट ने परीक्षा से एन वक्त पहले जारी किया आदेश
रानी दुर्गावती विवि में फीस भुगतान विवाद के कारण परीक्षा से रोके गए छात्रों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। परीक्षा से 1 घंटे पहले कोर्ट ने शामिल करने के आदेश दिए।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की परीक्षा से जुड़ा एक बेहद अनोखा और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां दोपहर की परीक्षा शुरू होने में महज एक घंटा बचा हुआ था और प्रभावित छात्रों ने राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा के समक्ष त्वरित सुनवाई के लिए विशेष आवेदन दायर किया गया। मामले की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को देखते हुए एकलपीठ ने याचिका पर औपचारिक सुनवाई पूरी करने से पहले ही छात्रों को तुरंत परीक्षा में शामिल कराने के कड़े आदेश जारी किए।
🎓 मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना के तहत मिला था एडमिशन: फीस के अभाव में विवि ने रोका एडमिट कार्ड
पूरा मामला रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूटीडी विभाग से एमएसडब्ल्यू (MSW) का कोर्स कर रहे छात्र शिवांकी तिवारी, राहुल दुबे, रितेश कुमार पांडे और तौफिक की याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना' के तहत उन्हें प्रवेश मिला था। इस योजना के नियम अनुसार पात्र पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों को केवल मेस शुल्क और कॉशन मनी देनी होती है, जबकि एडमिशन, एनरोलमेंट और परीक्षा फीस का भुगतान सीधे राज्य सरकार करती है।
इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सरकारी राशि न मिलने का हवाला देकर छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया था। याचिकाकर्ता शिवांकी और राहुल ने पहले सेमेस्टर तथा रितेश व तौफीक ने तीन सेमेस्टर सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लिए थे और उन्हें अगले सेमेस्टर की परीक्षा देनी थी।
🏛️ सरकार और विश्वविद्यालय के बीच फंसा मामला: गुरुवार को अचानक छात्रों को देने से किया इनकार
योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत राशि का भुगतान न किए जाने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरुआत में छात्रों को परीक्षा में बैठने से मना किया। बाद में छात्रों के आवेदन पर दूसरे सेमेस्टर के छात्रों को दो विषय तथा चौथे सेमेस्टर के छात्रों को एक विषय की परीक्षा में बैठने की अस्थायी अनुमति दी गई।
हालांकि, बुधवार की परीक्षा सम्पन्न होने के बाद गुरुवार को आयोजित होने वाली अगली परीक्षा में शामिल करने से विश्वविद्यालय ने अचानक मना कर दिया। इसके बाद गुरुवार सुबह ही छात्रों के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार कुशवाहा और अंजली तिवारी की ओर से हाईकोर्ट में त्वरित सुनवाई का आवेदन पेश किया गया।
⏱️ सुबह 11 बजे वकील को बुलाकर जारी किया निर्देश: दोपहर 12 बजे की परीक्षा में शामिल हुए छात्र
छात्रों के अधिवक्ताओं ने पीठ को अवगत कराया कि याचिकाकर्ताओं की परीक्षा उसी दिन दोपहर 12 बजे से निर्धारित है और समय बेहद कम है।
मामले की आपात स्थिति को देखते हुए एकलपीठ ने सुबह 11 बजे अनावेदक विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को तुरंत तलब किया और निर्देश जारी किया कि याचिकाकर्ता छात्रों को बिना किसी रुकावट के तुरंत 12 बजे की परीक्षा में शामिल किया जाए।
📑 "सरकार और विवि के आपसी विवाद की सजा छात्रों को नहीं मिल सकती": हाईकोर्ट ने मांगा 4 सप्ताह में जवाब
त्वरित निर्देश देने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका की विस्तृत सुनवाई की। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि परीक्षा फीस के भुगतान को लेकर अनावेदक विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच आपसी प्रशासनिक विवाद है, जिसकी वजह से छात्रों का शैक्षणिक सत्र खराब नहीं किया जा सकता।
एकलपीठ ने सभी याचिकाकर्ता छात्रों को आगामी परीक्षाओं में भी शामिल करने के निर्देश देते हुए अनावेदक विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों की परीक्षा का अंतिम परिणाम इस याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)