छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में हाईकोर्ट से बड़ी खबर; थोक व्यापारी को मिली जमानत, डॉक्टर की अर्जी खारिज
छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से 24 मासूमों की मौत के चर्चित मामले में जबलपुर हाईकोर्ट से थोक दवा विक्रेता राजेश सोनी को जमानत मिल गई है, जबकि सह-आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका निरस्त हो गई।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के एक आरोपी को जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिल गया है।हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दवा के थोक विक्रेता राजेश सोनी को जमानत प्रदान की है। गुरुवार को छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड से जुड़े दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें से एक आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी गई, जबकि थोक व्यापारी को अदालत ने राहत दी।
🧪 कफ सिरप में मिला था 46% जहरीला तत्व: 24 मासूम बच्चों की हुई थी दर्दनाक मौत
उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप के सेवन से 24 मासूम बच्चों की असमय मौत हो गई थी, जिससे पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था।
पुलिस और प्रयोगशाला की जांच में पाया गया था कि इस सिरप में 46 प्रतिशत डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG/DID) जैसा अत्यंत घातक और जहरीला रसायन मौजूद था। घटना के बाद पुलिस ने सिरप बनाने वाली कंपनी 'श्रीसन फार्मा' के मालिक रंगनाथन गोविंदन, केमिस्ट और तीन डॉक्टरों सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया था। इस मामले में पूर्व में आरोपी बनाई गईं ज्योति सोनी और सौरभ को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
💊 "दवा निर्माण में मेरी कोई भूमिका नहीं": 11 महीने से जेल में बंद थोक व्यापारी ने दी यह दलील
घटना में कई बच्चों की जान जाने के बाद पुलिस ने थोक दवा विक्रेता राजेश सोनी को भी आरोपी बनाया था और उन्हें अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
अदालत में थोक विक्रेता की ओर से पैरवी करते हुए तर्क दिया गया कि दवा के निर्माण या उसकी रासायनिक संरचना में उनकी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। उन्होंने केवल कंपनी से आया दवा का स्टॉक अन्य दुकानों को बेचा था। आवेदक विगत 11 महीनों से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।
🏛️ हाईकोर्ट एकलपीठ ने सुनाया फैसला: डॉक्टर एस.एस. ठाकुर की जमानत अर्जी ली गई वापस
जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद थोक दवा विक्रेता राजेश सोनी को राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
हालांकि, इसी प्रकरण के एक अन्य सह-आरोपी डॉक्टर एस.एस. ठाकुर को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत का रुख सख्त देखकर डॉ. एस.एस. ठाकुर के अधिवक्ता ने अपनी जमानत याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए एकलपीठ ने उनकी याचिका निरस्त कर दी।
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