यूपीआई पर एमडीआर चार्ज से भड़के इंदौर के व्यापारी; दुकानों पर लगाए पोस्टर, कांग्रेस ने बताया 'जजिया कर'

यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले एमडीआर (MDR) शुल्क के खिलाफ इंदौर में व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने दुकानों पर पोस्टर लगाए हैं, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

Sep 19, 2026 - 14:43
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यूपीआई पर एमडीआर चार्ज से भड़के इंदौर के व्यापारी; दुकानों पर लगाए पोस्टर, कांग्रेस ने बताया 'जजिया कर'

इंदौर। केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) लागू करने की घोषणा के बाद से ही देशभर के व्यापारी वर्ग में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। एक तरफ जहाँ छोटे और बड़े व्यापारी इस नई व्यवस्था और अतिरिक्त वित्तीय बोझ से चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने इस फैसले को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने अपनी दुकानों पर इस शुल्क के विरोध में पोस्टर और बैनर लगा दिए हैं।

🛍️ इंदौर में व्यापारियों ने संभाला मोर्चा: 125 संगठनों की बैठक के बाद 10 लाख ग्राहकों को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य

इंदौर में एमडीआर के खिलाफ सड़कों और सोशल मीडिया पर उतरे व्यापारियों का कहना है कि यदि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है, तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले आम ग्राहकों और विक्रेताओं दोनों पर अतिरिक्त लागत का बुरा असर पड़ेगा।

इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने जानकारी दी कि आंदोलन के अगले चरण में सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की पूरी तैयारी की गई है। संगठन की ओर से आगामी चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को इस विरोध अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि व्यापारियों की जायज मांगों और आपत्तियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखरता से रखा जा सके।

🏛️ ग्वालियर विधायक सतीश सिकरवार का हमला: "अंग्रेजों और जजिया कर की तरह हिटलरशाही चला रही सरकार"

शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर आगमन से पहले प्रदेशभर से पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को इंदौर बुलाया गया था।

ग्वालियर से इंदौर के लिए रवाना होने से पहले कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने मीडिया से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा— "जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है, तब से किसी न किसी बहाने नया टैक्स लगाकर आम जनता और व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। जैसे पुराने समय में 'जजिया कर' हुआ करता था और अंग्रेजों के जमाने में जबरन टैक्स थोपे जाते थे, ठीक उसी तरह यह सरकार हिटलरशाही चला रही है।"

💻 एक तरफ डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा, दूसरी तरफ टैक्स की मार: कांग्रेस ने जनता से जवाब मांगने की कही बात

कांग्रेस विधायक ने आगे कहा कि सरकार एक तरफ तो आम आदमी और दुकानदारों से नकदी छोड़कर ऑनलाइन पेमेंट अपनाने की अपील करती है और कैशलेस इकोनॉमी का ढिंढोरा पीटती है।

लेकिन दूसरी तरफ जब लोग डिजिटल पेमेंट की आदत डाल चुके हैं, तब उन पर अतिरिक्त शुल्क और टैक्स थोपकर उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। यह बेहद निंदनीय है और आने वाले चुनावों में देश की जनता इस मनमाने फैसले का जवाब वोट के जरिए जरूर देगी।

🏬 एमपी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने उठाई मांग: "छोटा व्यापारी भुखमरी की कगार पर पहुंचेगा, तुरंत स्थगित हो एमडीआर"

मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने भी व्यापारियों की चिंता साझा करते हुए इस फैसले को स्थगित करने की मांग की है।

उन्होंने बताया— "डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की प्रक्रिया में व्यापारी पहले ही साइबर फ्रॉड, बैंक अकाउंट फ्रीज होने और प्रशासनिक रिकवरी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में एमडीआर व्यापारियों के लिए एक और नए टैक्स जैसा साबित होगा। कई बार एक छोटे व्यापारी को 1 लाख रुपये का कपड़ा या सामान बेचने पर बमुश्किल 500 से 700 रुपये का मुनाफा होता है। अगर उसमें से भी एमडीआर काट लिया गया, तो सारा मुनाफा बैंक और पेमेंट कंपनियों के पास चला जाएगा। जमीनी हकीकत को देखते हुए सरकार को इस जनविरोधी शुल्क को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना चाहिए।"

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