भीषण गर्मी और मच्छरों का टॉर्चर, 15 दिन बाद ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा; धार कलेक्टर बंगले पर हंगामा
धार के ग्राम इमलीपुरा में 15 दिनों से बिजली न आने से आक्रोशित ग्रामीण देर रात सीधे कलेक्टर बंगले पहुँच गए। बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर खराबी और बिल बकाया होने की बात कही है।
धार। जिले के ग्राम इमलीपुरा में पिछले 15 दिनों से लगातार बिजली गुल रहने के कारण ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार देर रात टूट गया। भीषण गर्मी, उमस और मच्छरों के प्रकोप से बेहाल और परेशान स्थानीय निवासी देर रात वाहनों में सवार होकर सीधे कलेक्टर बंगले पर जा पहुँचे। ग्रामीण देर रात ही कलेक्टर से मिलने और अपनी समस्या सुनाने की ज़िद पर अड़ गए। जैसे ही कलेक्टर बंगले पर ग्रामीणों के जुटने की सूचना प्रशासनिक महकमे को लगी, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया और समस्या पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा देकर वापस घर भेजा।
🔦 "पढ़ाई ठप, गर्मी से बेहाल": जनसुनवाई में भी नहीं हुई सुनवाई, मजबूरी में खटखटाया कलेक्टर का दरवाजा
स्थानीय निवासी राजेश चौहान ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से बिजली की गंभीर समस्या बनी हुई है।
उन्होंने बताया— "पिछले 15 दिनों से पूरे गांव में लाइट पूरी तरह ठप है। कई बार लिखित शिकायत करने के बावजूद विद्युत विभाग का कोई भी कर्मचारी या लाइनमैन इसे ठीक करने नहीं आया। जनसुनवाई से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक को आवेदन दिए गए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। भीषण गर्मी में मच्छरों के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है और बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित है। जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो मजबूरी में हमें आधी रात को कलेक्टर साहब के बंगले का दरवाजा खटखटाना पड़ा।"
🔌 बिजली विभाग की सफाई: ओवरलोड और बकाया बिल बना रुकावट, 10% राशि जमा करने पर ही लगेगा ट्रांसफार्मर
मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्युत विभाग के अधिकारी निमेष कुमार ने पूरी स्थिति पर अपनी सफाई दी।
उन्होंने बताया कि ट्रांसफार्मर के फेज में खराबी आने और अचानक ओवरलोड बढ़ने के कारण गांव की बिजली सप्लाई प्रभावित हुई थी। गांव में तुरंत बिजली बहाल न हो पाने का मुख्य कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीणों पर भारी बिजली बिल बकाया है। नियमानुसार, यदि ट्रांसफार्मर जलता है या खराब होता है तो कुल बकाया राशि का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा उपभोक्ताओं द्वारा जमा कराना अनिवार्य होता है, तभी नया ट्रांसफार्मर लगाया जाता है। ग्रामीणों को समझा दिया गया है कि बकाया बिल का 10% जमा होते ही बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
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