डिजिटल सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल कर लिपिक ने बदला अपना पदनाम; 13 लाख के गबन में स्कूल प्रिंसिपल सस्पेंड
महासमुंद के सिरपुर स्कूल में क्लर्क ने खुद को व्याख्याता बताकर 13 लाख रुपये का वेतन घोटाला किया। मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रभारी प्राचार्य समेत 2 को निलंबित किया।
महासमुंद। जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरपुर में पदस्थ एक सहायक ग्रेड-02 लिपिक (क्लर्क) द्वारा खुद को व्याख्याता एलबी बताकर आठ महीने तक लगातार अतिरिक्त वेतन ऐंठने का गंभीर मामला सामने आया है।
कोष एवं महालेखाकार रायपुर के अधिकारियों द्वारा जब वित्तीय अभिलेखों की जांच की गई, तब इस बड़े घोटाले का भंडाफोड़ हुआ। आरोपी लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर को मामला उजागर होने पर पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका था। अब जांच की आंच स्कूल प्रशासन और जिला शिक्षा कार्यालय तक पहुंच गई है।
🕵️ ऐसे खुला 13 लाख रुपये के वेतन घोटाले का राज: संचालनालय कोष एवं लेखा की जांच में हुआ भंडाफोड़
शुरुआत में इस संगठित धोखाधड़ी की भनक न तो स्कूल के प्राचार्य को लगी और न ही ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO), जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या जिला कोषालय अधिकारी को।
यह मामला जनवरी 2026 में तब प्रकाश में आया, जब रायपुर स्थित संचालनालय कोष एवं लेखा ने सिरपुर स्कूल से अचानक अत्यधिक वेतन आहरित होते देख सूक्ष्म जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि लिपिक नारायण प्रसाद ने सिस्टम में हेरफेरी कर खुद को व्याख्याता बना लिया था और व्याख्याता स्तर का वेतन आहरित कर रहा था। इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी को भी उसके तय वेतन से अधिक राशि जारी की जा रही थी।
💻 डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग कर बदला पदनाम: लेवल-06 से खुद को कर लिया लेवल-09
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर स्कूल के सभी कर्मचारियों का वेतन बिल तैयार करने का काम देखता था।
वह प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर से डिजिटल सिग्नेचर (DSC) कराकर कोषालय से आसानी से वेतन आहरित करवा लेता था। डीईओ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अपने मूल पदनाम के पे-लेवल-06 को बदलकर फर्जी तरीके से 'व्याख्याता एलबी पे-लेवल-09' दर्ज कर लिया और वेतन निर्धारण में भी बढ़ोतरी कर ली। इस कृत्य से उसने शासन को लगभग 13 लाख रुपये की प्रत्यक्ष वित्तीय क्षति पहुंचाई।
🏫 प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल: 8 महीने तक सोता रहा बीईओ, डीईओ और कोषालय अमला
इस बड़े वित्तीय घोटाले ने जिला शिक्षा विभाग और कोषालय की प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लिपिक द्वारा लगातार आठ महीने तक बढ़ा हुआ अवैध वेतन लिया जाता रहा, लेकिन प्राचार्य, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के ऑनलाइन रिकॉर्ड मिलान में यह बड़ी गड़बड़ी समय रहते पकड़ में नहीं आ सकी। जिला कोषालय अधिकारी के पास हर महीने प्रस्तुत किए जाने वाले पे-बिल की जांच के दौरान भी यह भारी चूक अनदेखी रह गई, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।
⚖️ प्रभारी प्राचार्य और जिला शिक्षा कार्यालय के लिपिक पर गिरी गाज: तत्काल प्रभाव से निलंबित
शासकीय राशि के गबन और गंभीर वित्तीय अनियमितता के इस मामले में लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने कड़ा रुख अपनाया है।
प्रारंभिक जांच में संलिप्तता और पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही पाए जाने पर संचालनालय ने 18 सितंबर को आदेश जारी कर प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर और सहायक ग्रेड-2 अकील मोहम्मद खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग ने यह दंडात्मक कार्रवाई 'छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966' के नियम 9(1)(क) के तहत की है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय महासमुंद तय किया गया है।
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