छिंदवाड़ा में जैन समाज ने रखा 'ई-उपवास'; पर्यूषण पर्व पर 10 दिनों तक इंटरनेट व सोशल मीडिया से बनाई दूरी

छिंदवाड़ा में दसलक्षण पर्यूषण महापर्व के दौरान जैन समाज के लोग 'ई-उपवास' (डिजिटल डिटॉक्स) कर रहे हैं। 10 दिनों तक इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर साधना व भक्ति में ध्यान लगाया जा रहा है।

Sep 19, 2026 - 21:23
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छिंदवाड़ा में जैन समाज ने रखा 'ई-उपवास'; पर्यूषण पर्व पर 10 दिनों तक इंटरनेट व सोशल मीडिया से बनाई दूरी

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश में इन दिनों 'डिजिटल डिटॉक्स' का चलन तेजी से बढ़ रहा है। धार्मिक उपवास और पर्वों के दौरान डिजिटल उपकरणों, इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूरी बनाने की इस प्रक्रिया को 'ई-उपवास' कहा जा रहा है।

पढ़ाई-लिखाई से लेकर व्रत और साधना में एकाग्रता बनाए रखने के लिए इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। यही वजह है कि पर्यूषण पर्व के दौरान छिंदवाड़ा में जैन समाज की महिलाएं और युवा 'ई-उपवास' रख रहे हैं, ताकि पूजा-पाठ और भक्ति में पूरा ध्यान लगाया जा सके।

🧘 10 दिनों तक चलेगा ई-उपवास: इंटरनेट बंद कर केवल अध्यात्म से जुड़ रहे श्रद्धालु

छिंदवाड़ा की समाजसेवी श्वेता पाटनी बताती हैं कि वे पिछले 5 सालों से दसलक्षण पर्यूषण महापर्व के दौरान पूरे 10 दिनों तक अपने मोबाइल का इंटरनेट बंद रखकर सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना लेती हैं।

इस दौरान मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक फोन कॉल्स के लिए ही किया जाता है। दिगंबर जैन समाज के इस पर्व में भक्ति और संयम के साथ-साथ यह अनोखा 'डिजिटल अनुशासन' देखने को मिल रहा है, जो श्रद्धालुओं को केवल अध्यात्म की दुनिया से जोड़े रखता है।

🕉️ 16 सितंबर से शुरू हुआ महापर्व: अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन का 'ई-उपवास' का आह्वान

16 सितंबर से दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्यूषण महापर्व की शुरुआत हो चुकी है।

अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के आह्वान पर शहर समेत देशभर के सैकड़ों जैन युवक-युवतियां 'ई-उपवास' कर रहे हैं। श्वेता पाटनी ने बताया, "मोबाइल में इंटरनेट चालू रहने से लोग सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहते हैं, जिससे मन विचलित होता है और भटकाने वाले विचार आते हैं। 10 दिनों तक इंटरनेट बंद रहने से मन पूरी तरह शुद्ध, शांत और पूजा-पाठ में एकाग्र रहता है।"

🚫 सोशल मीडिया से मन का भटकाव: 'जियो और जीने दो' की भावना पर केंद्रित साधना

जैन दर्शन की मूल अवधारणा 'जियो और जीने दो' तथा 'किसी के बारे में बुरा मत सोचो' को आत्मसात करने के लिए यह पहल की गई है।

डिजिटल डिटॉक्स के जरिए श्रद्धालुओं का प्रयास रहता है कि उनके मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति गलत या नकारात्मक विचार न आएं। सोशल मीडिया के गैर-ज़रूरी इस्तेमाल को रोककर मन को संयमित और विचारों को पवित्र बनाना ही इस ई-उपवास का मुख्य उद्देश्य है।

⏱️ 6 घंटे की जगह केवल 1 घंटा उपयोग: धार्मिक संदेशों के प्रसार तक सीमित हुए डिजिटल साधन

अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के प्रदेश मीडिया प्रभारी दीपक राज जैन ने बताया कि सामान्य दिनों में युवा प्रतिदिन 5 से 6 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं, लेकिन पर्व के दौरान इसे घटाकर अधिकतम 1 घंटा कर दिया गया है।

इस एक घंटे का उपयोग भी केवल धार्मिक गतिविधियों की जानकारी और जैन दर्शन के संदेशों के प्रसार के लिए ही किया जा रहा है। बाकी बचा हुआ समय स्वाध्याय, जप और आत्म-साधना में लगाया जा रहा है। शहर के दिगंबर जिनालयों में आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालु ई-उपवास कर पूरी तन्मयता से शामिल हो रहे हैं।

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