तत्कालीन SDO सुचिता मेश्राम के बंगले में हुई थी फायरिंग; पन्ना और मंडला के आरोपियों पर मामला दर्ज
उमरिया में वन विकास निगम की तत्कालीन प्रभारी SDO सुचिता मेश्राम के बंगले में हर्ष फायरिंग के 9 महीने पुराने मामले में पुलिस ने 2 आरोपियों पर FIR दर्ज की।
उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में वन विकास निगम की तत्कालीन प्रभारी एसडीओ (SDO) सुचिता मेश्राम के शासकीय बंगले में आयोजित एक जन्मदिन समारोह के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के चर्चित मामले में आखिरकार करीब नौ महीने बाद पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
यह घटना 27 नवंबर 2025 की रात की बताई जा रही है। मामले में पुलिस ने अमानगंज (पन्ना) निवासी सत्येंद्र शुक्ला और महाराजपुर (मंडला) निवासी अतुल बाजपेई के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। यह पूरी कार्रवाई एसपी विजय भगवानी और एसडीओपी पी.एल. परस्ते के कड़े निर्देशों पर की गई है।
🎥 सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था ताबड़तोड़ फायरिंग का वीडियो: उठ रहे थे गंभीर सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 नवंबर की रात वन विकास निगम के शासकीय बंगले में एक भव्य जन्मदिन पार्टी आयोजित की गई थी। इसी कार्यक्रम के दौरान खुलेआम कई राउंड फायरिंग की गई थी, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।
वीडियो सार्वजनिक होने के बावजूद लंबे समय तक पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न किए जाने को लेकर लगातार प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हो रहे थे। अब जन दबाव और प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों पर शिकंजा कसा है।
🔫 घटना के समय पदस्थ थीं तत्कालीन प्रभारी SDO: फायरिंग के हथियार और कारतूसों की होगी जांच
उल्लेखनीय है कि घटना के समय सुचिता मेश्राम वन विकास निगम उमरिया में प्रभारी एसडीओ के पद पर पदस्थ थीं। बताया जा रहा है कि हाल ही में उनका प्रमोशन भी हो चुका है।
पुलिस अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि फायरिंग में किस तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया था, कुल कितने कारतूस चलाए गए थे और क्या वह हथियार वैध लाइसेंस का था या अवैध। इसके साथ ही जन्मदिन की पार्टी में मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
⚖️ राजनीतिक प्रभाव के कारण देरी की चर्चा: रेत कारोबार और अधिकारियों से सांठगांठ के आरोप
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर रही कि आरोपियों के कथित प्रभाव और ऊंची पहुँच के कारण ही पुलिस कार्रवाई में इतना लंबा विलंब हुआ।
सत्येंद्र शुक्ला को लेकर पूर्व में भी यह आरोप लगते रहे हैं कि वन विकास निगम के शासकीय कार्यों में उसका सीधा हस्तक्षेप रहता है और कई वन अधिकारियों से उसके करीबी संबंध हैं। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर उसके रेत कारोबार से जुड़े लोगों से भी सांठगांठ की बातें कही जाती रही हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
🔍 एफआईआर के बाद पुलिस जांच में जुटी: फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों का लिया जाएगा सहारा
पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के पश्चात अब इस हाई-प्रोफाइल केस की नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी गई है।
जांच टीम वायरल वीडियो की फॉरेंसिक लैब से सत्यता की जांच, घटनास्थल का निरीक्षण, पार्टी में शामिल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने तथा फायरिंग में इस्तेमाल हथियार से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जुटाने में लग गई है। नौ महीने बाद हुई इस कार्रवाई के बाद यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं।
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