ग्वालियर में 120 साल पुरानी सिंधिया राजघराने की विंटेज फोर्ड कार अब बाहर आएगी; कांच के शोकेस में दिखेगी रॉयल सवारी
ग्वालियर के नगर निगम संग्रहालय में बरसों से बंद सिंधिया राजघराने की 120 साल पुरानी विंटेज फोर्ड कार का रेस्टोरेशन कर कांच के शोकेस में प्रदर्शित किया जा रहा है।
ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम संग्रहालय के एक कमरे में पिछले सात दशकों से कैद रही लगभग 120 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विंटेज फोर्ड कार अब बाहर आने वाली है। यह दुर्लभ कार ग्वालियर के नगर निगम संग्रहालय की भव्यता में चार चांद लगाएगी। संग्रहालय में आने वाले देश-विदेश के सैलानी ही नहीं, बल्कि मुख्य सड़क से गुजरने वाला हर नागरिक इस ऐतिहासिक कार का दीदार कर सकेगा। यह विंटेज कार ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया (प्रथम) की निजी सवारी थी, जिसे आज भी बेहद सावधानी के साथ संरक्षित करके रखा गया है।
👑 महाराजा माधवराव सिंधिया की रॉयल सवारी: अमेरिका से मुंबई के रास्ते मंगवाई गई थी यह ऐतिहासिक कार
ग्वालियर के मोतीमहल के पास स्थित नगर निगम संग्रहालय का जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण का कार्य अत्यंत तीव्र गति से चल रहा है।
इसी नए और आधुनिक म्यूजियम के मुख्य आकर्षण के रूप में वर्ष 1904-05 की इस विंटेज फोर्ड कार को शामिल किया जा रहा है। सिंधिया रियासत के तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया (प्रथम) ने इसे अमेरिका (USA) से भारत मंगवाया था। उस दौर में मोटर कार खरीदना और उसका रखरखाव करना आम बात नहीं थी, लेकिन ग्वालियर के महाराजा इस बेहद आकर्षक और शक्तिशाली रॉयल कार से सफर किया करते थे।
👨👩👧👦 प्रशासनिक दौरों और पारिवारिक दौरों में होता था उपयोग: बाद में संग्रहालय को धरोहर के रूप में किया गया दान
ग्वालियर नगर निगम संग्रहालय के डिप्टी नोडल अधिकारी प्रमेश दत्त शर्मा के अनुसार, यह कार 120 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है।
शुरुआत में महाराजा माधवराव सिंधिया इसका उपयोग निजी व पारिवारिक आवागमन के लिए करते थे। पारिवारिक दौरों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों के निरीक्षण में भी इस कार का इस्तेमाल किया जाता था। महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम के बाद यह ऐतिहासिक कार उनके सुपुत्र नए महाराजा जीवाजी राव सिंधिया के शाही कलेक्शन का हिस्सा रही। मध्य भारत राज्य के गठन के पश्चात इसे ग्वालियर नगर निगम संग्रहालय को हेरिटेज धरोहर के रूप में सौंप दिया गया था, तब से यह संग्रहालय के संरक्षण में है।
🛠️ बॉम्बे के गैराज में तैयार हुई थी चेसिस और बॉडी: ए. हाईलैंड गैराज ने किया था खास डिजाइन
अमेरिका से भारत के बॉम्बे (मुंबई) पोर्ट पर इम्पोर्ट कराई गई यह कार जब भारत पहुँची, तब इसमें केवल फोर्ड का ओरिजिनल इंजन और चेसिस ही शामिल था।
इसके पश्चात कार की बॉडी और इंटीरियर तैयार करने का काम बॉम्बे स्थित 'ए. हाईलैंड गैराज' को सौंपा गया, जिसका फोर्ड सहित उस दौर की बड़ी कार निर्माता कंपनियों के साथ अनुबंध था। उन्होंने महाराजा की पसंद के अनुसार बॉम्बे में ही इस फोर्ड कार की बॉडी को खास तौर पर डिजाइन किया। मुंबई में कार पूरी तरह असेंबल और तैयार होने के बाद ग्वालियर लाई गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार संभवतः यह फोर्ड कंपनी की शुरुआती कारों में 'बी' सीरीज की कार थी।
🌟 अब कांच के ग्लास शोकेस में दिखेगी सुंदरता: विशेष कारीगर कर रहे हैं कार का रेस्टोरेशन
ग्वालियर की यह अनमोल ऐतिहासिक धरोहर पिछले 70 वर्षों से संग्रहालय के एक बंद कमरे में सुरक्षित रखी हुई थी।
संग्रहालय के कायाकल्प के साथ ही अब इसे सर्वसाधारण के समक्ष एक नए कलेवर में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है। प्रमेश दत्त शर्मा के मुताबिक, जिस कमरे में यह कार रखी थी, उसका स्वरूप बदलकर एक पारदर्शी ग्लास शोकेस (कांच का केबिन) बना दिया गया है। इसके अंदर और बाहर आधुनिक लाइटिंग लगाई जा रही है। इसके साथ ही विशेष कारीगरों को बुलाकर कार के रंग से मेल खाती लकड़ी व बॉडी का रेस्टोरेशन कराया जा रहा है, ताकि इसका असली वैभव निखर कर सामने आ सके।
🏎️ सिंधिया राजघराने के पास है दुर्लभ विंटेज कारों का कलेक्शन: 1924 की पहली रोल्स रॉयस भी है शामिल
सिंधिया रियासत के पास दुर्लभ और बेशकीमती विंटेज कारों का विशाल संग्रह रहा है।
सिंधिया रिसर्च सेंटर दिल्ली के इंचार्ज अरुणांश बी. गोस्वामी के अनुसार, महाराजा माधवराव सिंधिया के कलेक्शन में फोर्ड की 'T-690 CR' भी शामिल है, जिसे 1919 में कनाडा से मंगवाया गया था। उस दौर में इसके लिए लगभग 36,499 रुपये (तत्कालीन समय में 500 डॉलर) चुकाए गए थे। वह 4-सिलेंडर इंजन और 2 बीएचपी क्षमता वाली उस जमाने की हाईटेक कार थी। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1924 में भारत में आई पहली 'रोल्स रॉयस' (Rolls Royce) कार भी सिंधिया राजवंश के कलेक्शन की ऐतिहासिक धरोहर रही है।
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