क्या है देवास में चलाई जा रही मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना और इससे कैसे मिल रहा लाभ? पढ़िए विस्तृत खबर
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत देवास जिले में 38 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिला मकानों का मालिकाना हक। कलेक्टर नेहा मीना ने की प्रगति की समीक्षा।
मध्य प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत ग्रामीण अंचलों में निवासरत परिवारों को उनके पुश्तैनी मकानों और भूखंडों का वैधानिक मालिकाना हक दिलाने की दिशा में देवास जिले में ऐतिहासिक कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत अब तक देवास जिले में 38 हजार से अधिक निःशुल्क रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों को उनका कानूनी हक मिल गया है। इस योजना के धरातल पर क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने शुक्रवार को अचानक ग्राम बरखेड़ा कोतापाई का दौरा किया और योजना की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया।
🚁 अधिकार अभिलेख और ड्रोन सर्वे की स्थिति का निरीक्षण; हितग्राही इन्दर सिंह को मिला दस्तावेज
निरीक्षण और रजिस्ट्री की प्रक्रिया:
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दस्तावेजों की जांच: कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर अधिकार अभिलेख, आधुनिक ड्रोन सर्वेक्षण और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की पूरी प्रक्रिया को देखा और संबंधित अमले को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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निःशुल्क पंजीयन: इस दौरान कलेक्टर नेहा मीना की विशेष उपस्थिति में स्थानीय कृषक इندر सिंह की संपत्ति का निःशुल्क पंजीयन कराया गया और उन्हें उनके मालिकाना हक का मूल दस्तावेज सौंपा गया।
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हितग्राही की प्रतिक्रिया: मालिकाना हक का कानूनी दस्तावेज हाथ में मिलने पर इन्दर सिंह के चेहरे पर खुशी साफ झलक उठी। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहा कि इस दस्तावेज के मिलने से अब उन्हें अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, नया व्यवसाय शुरू करने और कृषि संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बैंक से ऋण (Loan) लेने में बेहद आसानी होगी।
⚡ अधिकारियों और पटवारियों को सख्त निर्देश; समय-सीमा में सभी पात्रों को मिले रजिस्ट्री का लाभ
प्रशासनिक निर्देश और अपील:
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तय समय-सीमा में कार्य: निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने राजस्व विभाग, पंचायत विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले यानी पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के प्रत्येक गांव में युद्ध स्तर पर सर्वे कराया जाए।
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पात्रों का चयन: यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र हितग्राही इस योजना से वंचित न रहे और सभी के घरों की रजिस्ट्रियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति से जुड़े विवादों में भारी कमी आने की उम्मीद है।
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