आबकारी टीआई दिलीप पुरी मामले में पुलिस को मिले अहम सुराग, बड़वानी और टिमरनी के शराब ठेकेदारों का फर्जीवाड़ा बेनकाब
देवास के खातेगांव टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड में जबलपुर से नया खुलासा। शराब दुकानें इंटरचेंज कर चला रहे थे आरोपी। जानिए पूरी खबर।
मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगांव में आबकारी निरीक्षक (TI) दिलीप पुरी की सड़क चेकिंग के दौरान हुई दर्दनाक मौत और हत्या के हाई-प्रोफाइल मामले में एक बेहद चौंकाने वाला नया खुलासा सामने आया है। जबलपुर में पुलिस द्वारा की जा रही गहन जांच पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि इस वारदात से जुड़े आरोपी बेहद शातिर और योजनाबद्ध ढंग से अपने अवैध व वैध शराब के कारोबार को संचालित कर रहे थे। पुलिस तफ्तीश में सामने आया है कि बड़वानी और टिमरनी की शराब दुकानों के लाइसेंसी नाम बदलकर और आपस में लोकेशन इंटरचेंज कर अवैध नेटवर्क चला रहे थे।
🏬 बड़वानी से टिमरनी तक लाइसेंस का हेरफेर; पाटेंद्र और मनीष जायसवाल की संदिग्ध भूमिका
कारोबार के फर्जीवाड़े का मॉडल:
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लाइसेंस और संचालक में अंतर: जांच में पता चला है कि बड़वानी का मूल निवासी पाटेंद्र जायसवाल है, लेकिन वहां की शराब दुकानों का आधिकारिक लाइसेंसी मनीष जायसवाल के नाम पर दर्ज है।
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इंटरचेंज की रणनीति: वहीं दूसरी ओर, टिमरनी स्थित शराब दुकान का लाइसेंस पाटेंद्र जायसवाल के नाम पर पंजीकृत है, लेकिन वहां की दुकान का पूरा कामकाज और संचालन राहुल जायसवाल संभालता है।
🛡️ कानूनी दांव-पेच और कोर्ट में बचाव की मंशा; पुलिस ने कसा शिकंजा
आरोपियों का शातिर प्लान:
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लोकेशन की आड़ में बचाव: पुलिस को आशंका है कि आरोपियों द्वारा दुकानों और संचालकों के इस इंटरचेंज के पीछे मुख्य मंशा यह थी कि भविष्य में यदि कोई बड़ी अवैध खेप, हादसा या कानूनी कार्रवाई होती है, तो वे लोकेशन और कागजातों का हवाला देकर कोर्ट में अपना बचाव आसानी से कर सकें।
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सघन तफ्तीश जारी: इस नए खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों के वित्तीय लेन-देन, लाइसेंस दस्तावेजों और नेटवर्क की परतें खंगालनी शुरू कर दी हैं, ताकि इस हत्याकांड और शराब सिंडिकेट के सभी मास्टरमाइंड्स को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
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