कूनो से गांधीसागर शिफ्ट की गई बोत्सवाना की मादा चीता CCB2; गांधीसागर में अब हुई 4 चीतों की मौजूदगी
बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB2 को कूनो नेशनल पार्क से गांधीसागर अभयारण्य स्थानांतरित किया गया। गांधीसागर में चीतों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है।
श्योपुर। 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत मध्य प्रदेश में चीतों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनरुत्थान का दायरा लगातार विस्तृत किया जा रहा है। इसी कड़ी में बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB2 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान (श्योपुर) से मंदसौर-नीमच क्षेत्र में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया गया है। इस नए स्थानांतरण के साथ ही अब गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है, जिससे मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण का दूसरा प्रमुख केंद्र तेजी से आकार ले रहा है।
✈️ बोत्सवाना से कूनो और अब गांधीसागर तक का सफर: भारतीय परिस्थितियों में पूरी तरह ढाला खुद को
उल्लेखनीय है कि मादा चीता CCB2 को 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से भारत लाया गया था, जिसके बाद प्रारंभिक चरण में उसे कूनो राष्ट्रीय उद्यान के विशेष बाड़े में रखा गया था।
सख्त क्वारंटीन और अनुकूलन (Acclimatization) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे कूनo के खुले जंगल में छोड़ा गया, जहाँ उसने भारतीय जलवायु, वन्य परिवेश और शिकार की परिस्थितियों के अनुरूप खुद को पूरी तरह ढाल लिया। अब पूरी तरह स्वस्थ और अनुकूलित होने के बाद उसे गांधीसागर अभयारण्य के नए प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित किया गया है।
🌲 गांधीसागर में अब हुए कुल चार चीते: दो नर और दो मादा चीतों का बना नया कुनबा
मादा चीता CCB2 के सुरक्षित पहुँचने के बाद गांधीसागर अभयारण्य में अब दो नर और दो मादा चीतों समेत कुल चार चीते हो गए हैं।
इसके साथ ही गांधीसागर को चीता संरक्षण के दूसरे प्रमुख और सुरक्षित केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार, कूनो और गांधीसागर को मिलाकर चीताओं के स्वच्छंद विचरण के लिए एक एकीकृत और सुरक्षित कॉरिडोर का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
🗺️ कूनो-गांधीसागर परिदृश्य का हो रहा विस्तार: केवल एक पार्क तक सीमित नहीं रहेगा प्रोजेक्ट चीता
CCB2 के गांधीसागर जाने से कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या में तात्कालिक रूप से एक की कमी दर्ज होगी।
हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के अनुसार इसे केवल संख्या की कमी के रूप में देखने के बजाय चीता संरक्षण के दीर्घकालिक विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार की योजना के तहत कूनो के साथ-साथ गांधीसागर को भी चीतों के प्राकृतिक प्रजनन और स्थायी आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है। प्रोजेक्ट चीता अब केवल एक राष्ट्रीय उद्यान तक सीमित न रहकर व्यापक कूनो-गांधीसागर लैंडस्केप प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
🐾 कूनो में गूंजी थी चार शावकों की किलकारी: प्राकृतिक प्रजनन से भारत में मजबूत हो रही चीता आबादी
इसी बीच कूनो राष्ट्रीय उद्यान से चीता संरक्षण को लेकर एक और सुखद खबर सामने आई थी।
अप्रैल 2026 में भारत की धरती पर जन्मी मादा चीता गामिनी (KGP12) ने कूनो के खुले वन क्षेत्र में सफलतापूर्वक चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसे भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया था। इससे कूनो में प्राकृतिक रूप से चीतों की आबादी बढ़ने और भारत में एक स्थायी चीता पारिस्थिकी तंत्र स्थापित होने की उम्मीदों को नया बल मिला है।
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