डोल ग्यारस पर नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा काल भैरव; सिंधिया राजघराने की शाही पगड़ी से होगा श्रृंगार

उज्जैन में डोल ग्यारस पर 22 सितंबर को बाबा काल भैरव की शाही सवारी निकलेगी। सिंधिया राजघराने की पगड़ी, सरकारी खजाने के आभूषण और जेल में विशेष पूजन रहेगा आकर्षण।

Sep 22, 2026 - 16:00
0
डोल ग्यारस पर नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा काल भैरव; सिंधिया राजघराने की शाही पगड़ी से होगा श्रृंगार

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन डोल ग्यारस के अवसर पर 22 सितंबर को आस्था, परंपरा और राजसी वैभव के अद्भुत संगम की साक्षी बनेगी।भगवान महाकाल के सेनापति और नगर कोतवाल माने जाने वाले बाबा काल भैरव चांदी की पालकी में सवार होकर मंगलवार देर शाम नगर भ्रमण पर निकलेंगे। यह सवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि उज्जैन की सदियों पुरानी परंपराओं और प्रशासनिक व राजकीय सम्मान की अनूठी झलक भी प्रस्तुत करती है।

⚔️ कलेक्ट्रेट व एसपी करेंगे पूजन, सशस्त्र पुलिस बल देगा गार्ड ऑफ ऑनर: शाम 4 बजे निकलेगी पालकी

पुजारी मोहित चतुर्वेदी ने बताया, "मंगलवार शाम करीब 4 बजे कलेक्टर और एसपी बाबा काल भैरव की पालकी में विराजित रजत मुखारविंद एवं चरण पादुकाओं का विधिवत पूजन करेंगे। इसके बाद सवारी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया जाएगा।"

मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ी बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर (Guard of Honour) देगी। सवारी में पुलिस बल का बैंड, आकर्षक धार्मिक झांकियां, हाथी-घोड़े और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

👑 सिंधिया राजघराने की शाही पगड़ी से होगा बाबा का भव्य श्रृंगार: ग्वालियर से उज्जैन लाई जा रही विशेष पगड़ी

बाबा काल भैरव के विशेष श्रृंगार में सिंधिया राजघराने की शाही पगड़ी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगी।

परंपरा के अनुसार, ग्वालियर से विशेष वाहन के माध्यम से यह पगड़ी उज्जैन लाई जा रही है। सवारी शुरू होने से पहले बाबा को यह शाही पगड़ी धारण कराई जाएगी। काल भैरव की सवारी में सिंधिया परिवार की पगड़ी पहनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे राज परिवार के प्रतिनिधि/सदस्य ही धारण करवाते हैं।

💎 सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से निकलेंगे बेशकीमती प्राचीन आभूषण: सोने-चांदी व रत्नों से सजेगा रूप

पुजारी मोहित ने आगे बताया, "बाबा काल भैरव के विशेष श्रृंगार के लिए सरकारी ट्रेजरी (Treasury) में सुरक्षित रखे गए पुराने एवं अत्यंत बेशकीमती आभूषणों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर लाकर बाबा को धारण कराने की परंपरा है, जो इस आयोजन को और खास बनाती है।"

सोने-चांदी और कीमती रत्नों से बने आभूषणों से बाबा का राजसी श्रृंगार किया जाएगा। खास बात यह भी है कि इस वर्ष बाबा के भव्य श्रृंगार और पूरे मंदिर परिसर को सजाने के लिए बेंगलुरु से विशेष किस्म के सुगंधित फूल मंगवाए गए हैं।

🏰 भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में होगा अनूठा पूजन: जेल अधीक्षक और बंदी करेंगे जयकारों व पुष्पवर्षा से स्वागत

बाबा काल भैरव की सवारी का सबसे अनूठा और ऐतिहासिक पड़ाव 'भैरवगढ़ केंद्रीय जेल' होता है।

नगर भ्रमण करते हुए जब बाबा की पालकी केंद्रीय जेल परिसर में पहुंचती है, तो जेल अधीक्षक द्वारा भगवान की पालकी और रजत पादुकाओं का विधिवत पूजन किया जाता है। जेल अधीक्षक और बंदियों (कैदियों) द्वारा जयकारे लगाने और पुष्पवर्षा करने की यह वर्षों पुरानी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

🌊 सिद्धवट पर पवित्र क्षिप्रा जल से होगा अभिषेक: जानिए सवारी का वापसी मार्ग

जेल परिसर में पूजन के बाद बाबा की सवारी मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के श्री सिद्धवट घाट पहुंचेगी।

यहां बैकुंठ द्वार पर पुजारी क्षिप्रा जल से बाबा काल भैरव और उनकी रजत चरण पादुकाओं का जल अभिषेक व पूजन करेंगे। इसके बाद सवारी बृजपुरा और जेल तिराहे से होते हुए रात लगभग 7:30 बजे तक पुनः काल भैरव मंदिर प्रांगण पहुंचेगी।

🛡️ साल में केवल दो बार निकलते हैं नगर कोतवाल: शक्तिपीठ के रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं काल भैरव

भगवान काल भैरव की भव्य नगर सवारी साल में केवल दो खास अवसरों पर ही निकाली जाती है—पहला डोल ग्यारस और दूसरा भैरव अष्टमी के अवसर पर।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, काल भैरव को उज्जैन का नगर कोतवाल, भगवान महाकाल का प्रधान सेनापति और 51 शक्तिपीठों का रक्षक माना जाता है। इसी जन-आस्था और धार्मिक भाव के साथ उनकी सवारी को उज्जैन की सांस्कृतिक परंपरा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User