उज्जैन का अनोखा मंदिर: जहाँ श्री कृष्ण की गुरु दक्षिणा के लिए खुद प्रकट हुए थे धन कुबेर, जानिए धनतेरस का महत्व

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में धनतेरस पर पूजे जाते हैं कुबेर देव। श्री कृष्ण की गुरु दक्षिणा से जुड़े इस मंदिर में दर्शन मात्र से मिलती है सुख-समृद्धि।

Nov 06, 2026 - 17:40
0
उज्जैन का अनोखा मंदिर: जहाँ श्री कृष्ण की गुरु दक्षिणा के लिए खुद प्रकट हुए थे धन कुबेर, जानिए धनतेरस का महत्व

धर्म और आस्था की पवित्र नगरी उज्जैन में एक ऐसा अद्वितीय मंदिर स्थित है, जहाँ धनतेरस पर धन के देवता कुबेर की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा दीक्षा के समय से जुड़ी हुई है। उज्जैन के इस पावन स्थान पर भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात गुरु सांदीपनि को गुरु दक्षिणा अर्पित करने के प्रसंग में स्वयं धन के देवता कुबेर के प्रकट होने की पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि जब श्री कृष्ण और बलराम अपने गुरु को गुरु दक्षिणा देने पहुँचे, तब कुबेर स्वयं अपरंपार धन-संपदा लेकर उपस्थित हुए थे, परंतु परम ज्ञानी गुरु सांदीपनि ने उनसे धन स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

इसके बाद देव कुबेर प्रतिमा स्वरूप में ही आश्रम परिसर में विराजमान हो गए। आज भी उनकी अति दुर्लभ प्रतिमा उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में स्थापित है। धनतेरस के दिन यहाँ आम दर्शनार्थियों के साथ-साथ व्यापारी वर्ग विशेष रूप से पूजन और दर्शन के लिए पहुँचता है, जो अपने व्यापार में उन्नति, आर्थिक मजबूती और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

📜 गुरु दक्षिणा के प्रसंग से जुड़ी है कुबेर प्रतिमा की मान्यता; 84 महादेव में से 40वें कुंडेश्वर मंदिर का है मामला

मंदिर का इतिहास और धार्मिक संदर्भ:

  • अंकपात मार्ग पर स्थित स्थान: शहर के अंकपात मार्ग स्थित भगवान श्री कृष्ण की पावन शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में 84 महादेवों में से 40वें कुंडेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में कुबेर देव की यह अति प्राचीन और दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है।

  • पंडित शिवांश व्यास का कथन: धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्री कृष्ण और बलराम ने शिक्षा पूरी कर लौटते वक्त जब गुरु दक्षिणा के बारे में पूछा, तब धन कुबेर स्वयं प्रकट हो गए थे। गुरु द्वारा धन लेने से मना करने पर कुबेर देव प्रतिमा रूप में इसी स्थान पर प्रतिष्ठित हो गए। यही कारण है कि इस मंदिर में कुबेर देव की उपस्थिति को सीधे श्री कृष्ण की गुरु दक्षिणा से जोड़कर देखा जाता है।

🗿 पुराविदों के अनुसार परमार कालीन है प्रतिमा; चतुर्भुज स्वरूप में विराजित हैं धन कुबेर

प्रतिमा का स्थापत्य और विशेषताएं:

  • काले बेसॉल्ट पाषाण से निर्मित: मंदिर में स्थापित धन कुबेर की प्रतिमा को लेकर पुराविदों का कहना है कि प्रतिमा समय के अनुसार बदली गई हो सकती है। वर्तमान में दिखाई देने वाली यह प्रतिमा काले बेसॉल्ट पाषाण की है, जो परमार कालीन स्थापत्य शैली की प्रतीत होती है।

  • चतुर्भुज रूप का रहस्य: यह प्रतिमा 3 फुट ऊँची और अति दुर्लभ चतुर्भुज (चार हाथों वाली) बैठी हुई मुद्रा में है। पंडित शिवांग व्यास के अनुसार, कुबेर देव के दो हाथों में धन की पोटली है, एक हाथ अभय मुद्रा में आशीर्वाद देता हुआ है तथा चौथे हाथ में सोम रस धारण किए हुए हैं।

🌿 नाभि में इत्र और अनार का भोग लगाने का है विधान; हल्दी की गांठ से भी होते हैं प्रसन्न

विशेष पूजन विधि और परंपरा:

  • धनतेरस से एक दिन पहले पूजा: धनतेरस पर कुबेर देव की मुख्य पूजा (हवन-यज्ञ और षोडशोपचार पूजन) एक दिन पूर्व ही संपन्न कर ली जाती है, जबकि धनतेरस के दिन केवल दर्शनों का क्रम जारी रहता है।

  • अनोखा श्रृंगार: कुबेर देव की नाभि में इत्र लगाया जाता है तथा अनार का फल और मेवा-मिष्ठान्न का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, जो भक्त स्वर्ण आभूषण भेंट करने में असमर्थ होते हैं, वे हल्दी की गांठ अर्पित कर भगवान कुबेर को प्रसन्न करते हैं।

🌟 5 अमावस्या तक लगातार दर्शन करने से पूर्ण होती है मनोकामना

भक्तों की आस्था और दर्शन का समय:

  • मनोकामना पूर्ति का नियम: मंदिर के पुजारी के अनुसार, विवाह में अड़चन, गृह क्लेश, नौकरी या व्यापारिक परेशानी से जूझ रहे भक्त यदि बिना क्रम तोड़े 5 अमावस्या तक भगवान के दर्शन करते हैं, नाभि पर इत्र लगाते हैं और अनार का भोग लगाते हैं, तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

  • धनतेरस पर दर्शन का समय: मंदिर के मुख्य पुजारी शैलेंद्र व्यास ने बताया कि सामान्य दिनों में मंदिर सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक खुलता है, लेकिन धनतेरस पर यह रात 10 बजे तक खुला रहेगा। शाम 07:30 बजे भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User