MP School Education News: महिला शिक्षकों के लिए बड़ी राहत; चाइल्ड केयर लीव में ई-अटेंडेंस की समस्या का होगा समाधान

मध्य प्रदेश की महिला शिक्षकों के लिए खुशखबरी! चाइल्ड केयर लीव में ई-अटेंडेंस संबंधी तकनीकी समस्याओं के लिए DPI ने बनाई विशेष समिति। जानें क्या है नई प्रक्रिया।

Jun 24, 2026 - 10:13
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MP School Education News: महिला शिक्षकों के लिए बड़ी राहत; चाइल्ड केयर लीव में ई-अटेंडेंस की समस्या का होगा समाधान

जबलपुर। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षिकाओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने 'चाइल्ड केयर लीव' (संतान पालन अवकाश) के दौरान ई-अटेंडेंस पोर्टल पर आ रही तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब अवकाश स्वीकृत होने के बाद भी उपस्थिति दर्ज न होने जैसी समस्याओं से शिक्षिकाओं को मुक्ति मिलेगी।

📊 ई-अटेंडेंस में तकनीकी बाधाओं का समाधान

अब तक कई महिला शिक्षिकाओं को यह समस्या झेलनी पड़ रही थी कि उनका अवकाश आधिकारिक रूप से स्वीकृत होने के बावजूद ई-अटेंडेंस पोर्टल पर दर्ज नहीं होता था। इसके कारण उनके वेतन, सेवा अभिलेखों (Service Records) और अन्य प्रशासनिक कार्यों में बड़ी अड़चनें आ रही थीं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने इस समस्या का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

👥 शिकायतों के लिए राज्य स्तरीय विशेष समिति का गठन

इस समस्या के निराकरण के लिए विभाग ने राज्य स्तर पर एक 'अभ्यावेदन निराकरण समिति' का गठन किया है। नई व्यवस्था के तहत:

  • ई-मेल के माध्यम से आवेदन: जिन शिक्षिकाओं को अटेंडेंस में समस्या आ रही है, वे अपने आवेदन ई-मेल के जरिए सीधे समिति को भेज सकती हैं।

  • दस्तावेजों की जांच: समिति अवकाश स्वीकृति और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र मामलों में पोर्टल पर सुधार सुनिश्चित करेगी।

  • समयबद्ध समाधान: जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि इन मामलों को बिना किसी देरी के राज्य स्तरीय समिति को भेजा जाए ताकि कोई भी मामला जिला स्तर पर लंबित न रहे।

✅ केवल संतान पालन अवकाश के लिए विशेष प्रावधान

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस प्रणाली की तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए फिलहाल यह राहत विशेष रूप से 'संतान पालन अवकाश' (Child Care Leave) के मामलों में दी गई है। शिक्षक संगठनों और महिला शिक्षिकाओं द्वारा उठाई जा रही इस मांग पर विभाग का यह कदम सराहनीय है, जिससे हजारों महिला शिक्षिकाओं को प्रशासनिक उलझनों से राहत मिलेगी।

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