मुरैना का 'फर्जी दिव्यांग शिक्षक' घोटाला: 47 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों पर संशय, प्रशासन ने फिर शुरू की जांच
मुरैना जिले में 47 शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाण पत्र संदिग्ध। जिला प्रशासन ने शिक्षा विभाग से मांगा रिकॉर्ड। पहले भी 70 फर्जी शिक्षकों पर दर्ज हो चुके हैं केस।
मुरैना। जिले में फर्जी दिव्यांग (विकलांग) प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की शिकायत के बाद लोक शिक्षण विभाग ने 47 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों को संदिग्ध मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय द्वारा बरती जा रही ढिलाई के कारण जांच प्रक्रिया बार-बार अटक रही है। अब अपर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए DEO बीएस इंदौलिया को सभी 47 शिक्षकों के मूल प्रमाण पत्र पेश करने के आदेश दिए हैं।
📁 पुरानी फाइलें कोतवाली में धूल फांक रही हैं
यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी एके पाठक ने मुरैना कोतवाली में 70 से अधिक फर्जी दिव्यांग शिक्षकों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई थी। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी यह मामला अदालत तक नहीं पहुंच सका है। शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच प्रमाणपत्रों के हस्तांतरण को लेकर विरोधाभासी बयान दिए जा रहे हैं, जिसके कारण पुलिस की जांच ठंडे बस्ते में है और फाइलें धूल फांक रही हैं।
🔍 अस्पताल प्रबंधन की असमर्थता
कलेक्टर के निर्देश पर जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएस तोमर ने जांच शुरू की, तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 47 संदिग्ध शिक्षकों में से कितनों के प्रमाणपत्र वास्तव में जिला अस्पताल से बने हैं, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा विभाग इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराता, तब तक यह स्पष्ट करना असंभव है कि प्रमाणपत्र असली हैं या फर्जी।
📍 जौरा और सबलगढ़ में फर्जीवाड़े का जाल
शिकायतकर्ता अनार सिंह जादौन के अनुसार, फर्जीवाड़े का यह जाल काफी गहरा है। उनके मुताबिक, पटवारी भर्ती में जौरा तहसील के सबसे अधिक फर्जी दिव्यांग शामिल हैं। वहीं, शिक्षक भर्ती में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़े के मामले सबलगढ़ के टेंटरा संकुल, जाबरौल, कन्या शाला सबलगढ़, राजाकातोर, झुंडपुरा, रामपुरकलां, गुरैमा और उत्कृष्ट स्कूल सबलगढ़ संकुल से सामने आए हैं।
⚖️ प्रशासन की बढ़ती सख्ती
शुक्रवार, 12 जून की शाम अपर कलेक्टर अश्विनी रावत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर संबंधित सभी 47 शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने को कहा है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस बार समय पर रिकॉर्ड सौंपता है या जांच एक बार फिर फाइलों में दबी रह जाती है।
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