मध्यप्रदेश के 4 उत्पादों को मिला GI टैग: भोपाली बटुआ और जरी क्राफ्ट की बढ़ेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

मध्य प्रदेश के चार प्रमुख उत्पादों—भोपाली बटुआ, खजुराहो मेटल क्राफ्ट, मालवा पेंटिंग और सारंगपुर हैंडलूम को मिला GI टैग। स्थानीय कारीगरों को मिलेगा सीधा लाभ।

Jun 15, 2026 - 09:48
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मध्यप्रदेश के 4 उत्पादों को मिला GI टैग: भोपाली बटुआ और जरी क्राफ्ट की बढ़ेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

भोपाल। मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को एक बड़ी वैश्विक पहचान मिली है। राज्य के चार विशिष्ट उत्पादों—भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट, खजुराहो मेटल क्राफ्ट, मालवा पेंटिंग और सारंगपुर हैंडलूम को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि न केवल इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण प्रदान करेगी, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी ब्रांड वैल्यू को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

🤝 'जीआई मैन ऑफ इंडिया' और नाबार्ड का रहा अहम योगदान

इस सफलता के पीछे राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नाबार्ड ने न केवल वित्तीय सहायता प्रदान की, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन और शिल्पकार समूहों के बीच समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश एमएसएमई विभाग और 'जीआई मैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री रजनीकांत के तकनीकी सहयोग ने इस लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

✨ ये हैं GI टैग पाने वाले 4 उत्पाद
  • भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (भोपाल): यह उत्पाद अपनी बारीक जरी-जरदोजी की कारीगरी और नवाबी नफासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

  • खजुराहो मेटल क्राफ्ट (छतरपुर): पीतल और अन्य धातुओं पर की गई उत्कृष्ट हस्तकला का अनूठा उदाहरण।

  • मालवा पेंटिंग (धार): मालवा अंचल की सदियों पुरानी पारंपरिक लोक चित्रकला, जो अपनी विशिष्ट शैली के लिए जानी जाती है।

  • सारंगपुर हैंडलूम साड़ी एवं फैब्रिक्स (राजगढ़): अपनी गुणवत्ता और पारंपरिक बुनावट के लिए प्रसिद्ध हथकरघा वस्त्र।

🚀 GI टैग से स्थानीय कारीगरों को मिलेंगे नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने से न केवल स्थानीय उत्पादों की प्रमाणिकता बढ़ेगी, बल्कि नकली उत्पादों की बिक्री पर कानूनी रूप से रोक भी लगेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ स्थानीय कारीगरों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों को होगा। इससे उन्हें अपनी कला के बदले उचित मूल्य मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे।

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