Ujjain Simhasth 2028: पुजारियों को ट्रेनिंग देने के मुद्दे पर विवाद; अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने जताया कड़ा विरोध

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में पुजारियों के प्रशिक्षण पर विवाद। IITTM की योजना को पुजारियों ने बताया अपनी तौहीन, माफी की मांग की।

Jun 24, 2026 - 18:01
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Ujjain Simhasth 2028: पुजारियों को ट्रेनिंग देने के मुद्दे पर विवाद; अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने जताया कड़ा विरोध

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 के सफल आयोजन के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन व यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM) ने उज्जैन में पंडे, पुजारियों व टैक्सी चालकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करना है। हालांकि, इस योजना के सामने आते ही अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इसे अपनी परंपरा और सम्मान के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

📊 क्या है IITTM की प्लानिंग?

IITTM के समन्वयक चंद्र शेखर बरुआ के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रद्धालुओं की सेवा को और बेहतर बनाने के लिए है। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें सिखाई जानी थीं:

  • विनम्र व्यवहार: श्रद्धालुओं के साथ मुस्कुराहट के साथ संवाद।

  • धैर्य प्रबंधन: गुस्से पर काबू पाना और कठिन परिस्थितियों में संयम।

  • विशेष सहायता: महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद करना।

  • पारदर्शिता: उचित किराया और दक्षिणा के संबंध में स्पष्टता।

⚖️ पुजारियों का पक्ष: "हमें ट्रेनिंग की जरूरत नहीं"

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश शर्मा ने इस ट्रेनिंग को पुजारियों के गौरव के खिलाफ बताया है। उनका कहना है, "तीर्थ परंपरा में हमारी भूमिका सदियों पुरानी है। पुजारियों का व्यवहार हमेशा से ही श्रद्धालुओं के प्रति सम्मानजनक रहा है। यदि कहीं दुर्व्यवहार या भेदभाव की शिकायतें मिलती हैं, तो वह मंदिर प्रबंध समिति और प्रशासनिक जिम्मेदारों की कमी है, पुजारियों की नहीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि IITTM को इस प्रस्ताव के लिए पंडे-पुजारियों से माफी मांगनी चाहिए।

🎯 सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन ही प्राथमिकता

IITTM का तर्क है कि वे किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहते, बल्कि समय के साथ नई जानकारियाँ साझा करना चाहते हैं। बरुआ ने स्पष्ट किया कि पर्यटन एक सेवा उद्योग है और ट्रेनिंग का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को यादगार बनाना है। फिलहाल, यह विवाद प्रशासन और महासंघ के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, और आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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