Gwalior Cyber Fraud: 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर रिटायर्ड महिला कर्मचारी से डेढ़ करोड़ की ठगी; 33 दिनों तक रखा बंधक
ग्वालियर में रिटायर्ड महिला कर्मचारी 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार। ठगों ने 33 दिनों तक घर में कैद रख ऐंठे 1.57 करोड़ रुपये। पढ़ें पूरी साइबर ठगी की रिपोर्ट।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश का ग्वालियर इन दिनों साइबर ठगों का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ के सरदार पाटनकर साहब क्षेत्र में रहने वाली स्वास्थ्य विभाग की सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन मीनाक्षी नाखरे साइबर ठगों की शातिराना चाल का शिकार हो गई हैं। ठगों ने उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 33 दिनों तक अपने घर में कैद रखा और डरा-धमकाकर 1.57 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ऐंठ ली।
📞 CBI का डर दिखाकर रचा चक्रव्यूह
ठगों ने खुद को दिल्ली का सीबीआई अधिकारी बताते हुए मीनाक्षी को फोन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला के मोबाइल नंबर का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में हुआ है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर ठगों ने महिला पर इतना मानसिक दबाव बनाया कि उन्होंने अपनी चार एफडी (FD) तुड़वा लीं। 10 मई से 13 जून तक महिला लगातार उनके डिजिटल नियंत्रण में रही और आरोपियों के निर्देश पर अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर करती रही।
✈️ दिल्ली पहुंचने पर खुला ठगी का राज
ठगों ने महिला को भरोसा दिलाया था कि एनओसी (NOC) मिलने के बाद वह सुरक्षित हैं। जब 16 जून तक कोई एनओसी नहीं मिली, तो 18 जून को महिला खुद दिल्ली पहुँची। बाराखंभा पुलिस स्टेशन जाकर जब उन्होंने अपने केस के बारे में जानकारी माँगी, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर स्कैम का शिकार हो चुकी हैं। ठगों ने तब तक अपने मोबाइल नंबर बंद कर दिए थे।
🔍 पुलिस की जांच और अपील
ग्वालियर साइबर सेल के डीएसपी मनीष यादव ने बताया कि पुलिस मामले की तकनीकी जांच कर रही है। बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर अपराधियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी जांच एजेंसी के नाम पर आने वाले संदिग्ध वीडियो कॉल या पैसों की मांग करने वाले नंबरों पर भरोसा न करें। इस तरह की स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल (1930) से संपर्क करें।
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