भावांतर योजना को लेकर किसानों में नाराजगी, कहा- पंजीयन के बजाय सीधी मंडी में फसल बेचना बेहतर

मध्य प्रदेश के रतलाम में सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के लिए पंजीयन शुरू हो चुके हैं, लेकिन भुगतान में देरी और पिछले अनुभवों के चलते किसानों में रुचि नहीं दिख रही है।

Oct 03, 2026 - 19:07
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भावांतर योजना को लेकर किसानों में नाराजगी, कहा- पंजीयन के बजाय सीधी मंडी में फसल बेचना बेहतर

मध्य प्रदेश में शनिवार से सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के तहत किसानों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस बार सरकार की ओर से सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5708 रुपए निर्धारित किया गया है, जिसके आधार पर किसानों को भावांतर योजना का लाभ मिलना है। हालांकि, पहले ही दिन सोयाबीन उत्पादक किसानों में इस योजना के प्रति कोई उत्साह या रुचि देखने को नहीं मिली है। किसानों ने भावांतर व्यवस्था से असंतोष जताते हुए मांग की है कि सरकार को बीच का रास्ता अपनाने के बजाय सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सोयाबीन की सीधी खरीदी करनी चाहिए।

⏳ पिछले साल के कड़वे अनुभवों से आशंकित किसान: बोले- कब होगा भुगतान और कब होगी खरीदी, स्थिति स्पष्ट नहीं

रतलाम में भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायतों, एमपी ऑनलाइन कियोस्क और सीएससी केंद्रों पर निशुल्क पंजीयन की व्यवस्था की गई है, बावजूद इसके किसान लाइनों में लगने से बच रहे हैं। किसान अनिल कटारिया ने बताया कि छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों ने तो अपनी सोयाबीन की फसल पहले ही निकालकर मंडी में बेच दी है, और अब जाकर पंजीयन शुरू किए जा रहे हैं। वहीं, आंबा गांव के किसान निखिलेश प्रजापत का कहना है कि पिछले पांच सालों से वे पंजीयन के लिए कागजात लेकर लाइन में लग रहे हैं और बाद में भुगतान के लिए परेशान होना पड़ता है।

🚫 किसान नेताओं ने बताया 'फोटोकॉपी योजना': व्यापारियों को लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप, भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं

किसान नेता डीपी धाकड़ ने इस योजना को 'फोटोकॉपी योजना' करार देते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब सरकार समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने की बात करती है, तो फिर इस तरह की जटिल भावांतर योजना की आवश्यकता ही क्या है। किसानों का आरोप है कि यह व्यवस्था केवल कागजी कार्रवाई और व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है। हालांकि ग्राम पंचायतों में पंजीयन शुरू हो चुके हैं, लेकिन बेची जाने वाली फसल का भुगतान किस तय फार्मूले और समयसीमा के तहत होगा, इसको लेकर अब तक कोई स्पष्ट निर्देश सामने नहीं आए हैं।

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