Digital Arrest Alert: पढ़े-लिखे लोग बन रहे साइबर ठगी का शिकार; डॉक्टर और रिटायर्ड अफसर भी नहीं सुरक्षित
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामले: ग्वालियर में डॉक्टर, इंजीनियर और रिटायर्ड अधिकारी करोड़ों की ठगी के शिकार। जानें ठगों का तरीका और खुद को सुरक्षित रखने के उपाय।
ग्वालियर। यदि आपको लगता है कि साइबर ठगी का शिकार केवल कम पढ़े-लिखे लोग होते हैं, तो यह आपकी भूल है। हालिया आंकड़े हैरान करने वाले हैं। डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के 95 प्रतिशत मामलों में पीड़ित उच्च शिक्षित वर्ग से हैं। इनमें नामचीन डॉक्टर, इंजीनियर, रिटायर्ड पुलिस-सेना अधिकारी, प्रोफेसर और बड़े व्यवसायी शामिल हैं। ठगों का मुख्य निशाना वे लोग हैं जिनके पास रिटायरमेंट फंड या बड़ी पूंजी जमा है।
🧠 तकनीकी अज्ञानता नहीं, "डर" है सबसे बड़ा हथियार
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट का खेल तकनीक से ज्यादा मनोवैज्ञानिक डर पर टिका है। अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताते हैं। वे फोन पर डराते हैं कि आपके नाम से अवैध पार्सल (ड्रग्स या हथियार) पकड़ा गया है या आपके सिम का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए वे पीड़ित को दिनों या महीनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर उनकी जीवनभर की कमाई हड़प लेते हैं।
📉 बड़े मामले: करोड़ों की चपत
शहर में डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं के दो बड़े उदाहरण सामने हैं:
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केस 1: पड़ाव स्थित खेड़ापति कॉलोनी के 74 वर्षीय रिटायर्ड रजिस्ट्रार बिहारीलाल गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर 1.12 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
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केस 2: धाटीपुर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को भी इसी तरह फंसाकर 2.52 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
🛡️ क्या है बचाव का तरीका?
पुलिस मुख्यालय द्वारा 'सेफ क्लिक' अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड अधिकारियों और वरिष्ठ नागरिकों को भी जागरूक किया जाए। याद रखें:
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कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर आपसे पैसे की मांग नहीं करती।
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किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते की जानकारी या पैसे ट्रांसफर न करें।
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डर और दबाव में कोई भी फैसला लेने के बजाय तुरंत अपने नजदीकी साइबर सेल को सूचित करें।
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