नेपाल और दुबई भागने की फिराक में थी मॉडल श्रद्धा दुबे; नागपुर से गिरफ्तारी के बाद अब क्या है ताजा स्थिति?

लखनऊ के बहुचर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड में आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और ड्राइवर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस द्वारा कस्टडी रिमांड न मांगने पर उठ रहे हैं सवाल।

Oct 31, 2026 - 20:35
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नेपाल और दुबई भागने की फिराक में थी मॉडल श्रद्धा दुबे; नागपुर से गिरफ्तारी के बाद अब क्या है ताजा स्थिति?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले दिनों हुए बहुचर्चित करोड़पति कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड को लेकर एक बार फिर असमंजस और तीखे सवालों का दौर शुरू हो गया है। 10 दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने पर मुख्य हत्यारोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को अदालत में पेश किया गया। इस दौरान लखनऊ पुलिस की तरफ से आरोपियों की कस्टडी रिमांड (PCR) की कोई अर्जी नहीं लगाई गई, जिसके चलते कोर्ट ने तीनों को वापस 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

आपको बता दें कि लखनऊ के हजरतगंज इलाके के बालू अड्डा स्थित 'अवध ग्रीन अपार्टमेंट' की चौथी मंजिल के फ्लैट से संदिग्ध परिस्थिति में नीचे गिरने से कैफे मालिक शिवा शर्मा की 9 अक्टूबर 2026 की रात मौत हो गई थी। इस घटना के बाद शिवा के परिजनों की शिकायत पर गर्लफ्रेंड श्रद्धा दुबे व अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से सभी आरोपी फरार चल रहे थे।

✈️ नेपाल और दुबई भागने की योजना और नागपुर से गिरफ्तारी

घटना को अंजाम देने के बाद श्रद्धा दुबे अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ भागकर नेपाल पहुंच गई थी। वहां से उसने दुबई भागने की एक बड़ी योजना बनाई थी, लेकिन जब वह प्लान सफल नहीं हुआ तो वह चुपचाप लखनऊ वापस लौट आई और मीडिया के सामने बयान देकर एक बार फिर भूमिगत हो गई।

इसके बाद हरकत में आई यूपी एसटीएफ (UP STF) की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर नागपुर के एक फ्लैट से श्रद्धा को धर दबोचा और लखनऊ ले आई। यहां स्थानीय अदालत ने उसे पहले 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

❓ कस्टडी रिमांड नहीं मांगने पर खड़े हुए गंभीर सवाल

10 दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने पर शनिवार को श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया।

  • उम्मीदें टूटीं: जानकारों और पीड़ित पक्ष को पूरी उम्मीद थी कि पुलिस इस मौके पर तीनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करेगी, ताकि उनसे गहनता से पूछताछ की जा सके।

  • यह उम्मीद इसलिए भी प्रबल थी क्योंकि गिरफ्तारी के वक्त शुरुआती पूछताछ में श्रद्धा ने पुलिस का बिल्कुल सहयोग नहीं किया था। ऐसे में पुलिस ने खुद दावा किया था कि कस्टडी में लेकर आगे की कड़ियां जोड़ी जाएंगी, लेकिन रिमांड न मांगे जाने से अब पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

🕵️‍♂️ 10 दिन जेल में रहने के बावजूद पुलिस ने नहीं दर्ज किए बयान

चौंकाने वाली बात यह है कि श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और ड्राइवर पिछले 10 दिनों से जेल में बंद हैं, लेकिन इन दस दिनों के भीतर एक बार भी पुलिस ने उनके औपचारिक बयान तक दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई।

पुलिस का पूरा फोकस केवल श्रद्धा के गायब हुए पुराने मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की तलाश पर रहा। हालांकि, गिरफ्तारी के वक्त श्रद्धा के पास से जो नया मोबाइल फोन बरामद हुआ, वह भी पूरी तरह से फॉर्मेट (Format) किया हुआ था, जिसके चलते पुलिस के हाथ कोई ठोस डिजिटल सबूत नहीं लग पाया है।

🔍 श्रद्धा के पुराने मोबाइल फोन का अनसुलझा राज

जब श्रद्धा दुबे पुलिस की गिरफ्त में आई, तो उसके पास एक नया फोन था। पुराने फोन के बारे में उसने गुमराह करते हुए कहा था कि वह नेपाल में कहीं गिर गया है।

  • वहीं, पुलिस का मानना है कि श्रद्धा ने पुराने फोन को खुद तोड़कर नष्ट कर दिया है।

  • पुलिस इसी पुराने मोबाइल के जरिए उस खास 'मददगार' तक पहुंचना चाहती थी, जिसने श्रद्धा को नेपाल भगाने, वापस लखनऊ लाने और फिर नागपुर में छिपाने में अहम भूमिका निभाई थी।

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