रतलाम न्यूज़: ड्रोन सर्वे में नाम और नक्शे की बड़ी गलती! रतलाम के गांवों में फ्री रजिस्ट्री के नाम पर भटक रहे लोग

रतलाम में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे की गड़बड़ियों से ग्रामीणों को फ्री रजिस्ट्री के लिए तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। प्रशासन त्रुटियों को सुधारने में जुटा है।

Nov 02, 2026 - 20:52
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रतलाम न्यूज़: ड्रोन सर्वे में नाम और नक्शे की बड़ी गलती! रतलाम के गांवों में फ्री रजिस्ट्री के नाम पर भटक रहे लोग

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके मकान, प्लॉट और जमीन का भू-अधिकार देने के लिए स्वामित्व योजना (Swamitva Yojana) के तहत ड्रोन सर्वे कराकर रिकॉर्ड को डिजिटलाइज किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के प्लॉट और मकानों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराकर लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी हक दिलाना है, जिससे उन्हें बैंक से लोन लेने में भी आसानी हो सके। हालांकि, रतलाम जिले में यही फ्री अब कई हितग्राहियों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। ड्रोन सर्वे में आई तकनीकी और मैदानी गड़बड़ियों के कारण लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

⚠️ ड्रोन सर्वे में नाम और नक्शे की गंभीर गड़बड़ियां; रतलाम के गांवों में बढ़ी मुश्किलें

फ्री रजिस्ट्री करवाने वाले हितग्राहियों की समस्याएं:

  • दफ्तरों के चक्कर: मुफ्त रजिस्ट्री करवाने की उम्मीद लेकर पहुंचे हितग्राहियों को अब तहसील और एसडीएम कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

  • रिकॉर्ड में सुधार की जटिलता: रतलाम जिले के कई गांवों में ड्रोन सर्वे के दौरान नाम दर्ज करने और नक्शा तैयार करने में भारी त्रुटियां हुई हैं, और रिकॉर्ड में सुधार के लिए कोई तात्कालिक सिंगल-विंडो व्यवस्था न होने के कारण लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

  • अतिरिक्त आर्थिक बोझ: सेमलिया गांव के विजेंद्र सिंह ने बताया कि ड्रोन सर्वे में उनके और उनके पिता का नाम गलत दर्ज कर दिया गया था, जिसे ठीक करवाने के लिए उन्हें तहसील से लेकर एसडीएम कोर्ट तक चक्कर काटने पड़े और डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी समाधान नहीं हुआ। इस प्रक्रिया में उन्हें वकील की फीस और शपथ पत्रों पर अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े।

📉 पड़ोसी के नक्शे में दर्ज हो गया आधा मकान; शासकीय संपत्ति पर निजी नाम चढ़ने का आरोप

ग्रामीणों के अनुभव और शिकायतें:

  • नक्शों की अदला-बदली: सेमलिया गांव के ही जसवंत सिंह ने बताया कि सर्वे के दौरान उनके मकान का कुछ हिस्सा पड़ोसी के नक्शे में दर्शा दिया गया है। संशोधन के लिए आवेदन और शपथ पत्र बनवाने में ही 3 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब तक रजिस्ट्री नहीं हुई।

  • गंभीर तकनीकी खामियां: ग्रामीण बलवंत सिंह का कहना है कि ड्रोन सर्वे में इतनी बड़ी लापरवाही हुई है कि कई जगहों पर शासकीय संपत्ति पर निजी लोगों के नाम दर्ज हो गए हैं। किसी का किचन दूसरे के प्लॉट के नक्शे में तो किसी का कमरा और टॉयलेट पड़ोसी के रिकॉर्ड में चढ़ा दिया गया है।

  • करमदी गांव की स्थिति: करमदी गांव के कैलाश पाटीदार ने बताया कि पटवारी से संपर्क करने पर पता चला कि उनके घर का आधा हिस्सा पड़ोसी के रिकॉर्ड में दर्ज है, जिसे ठीक कराने के लिए उन्हें नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया है।

✍️ एसडीएम ने दिया त्रुटियों को सुधारने का भरोसा; सामूहिक आवेदन की प्रक्रिया शुरू

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और समाधान:

  • सामूहिक आवेदन की सुविधा: रतलाम ग्रामीण के एसडीएम हरित ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे से जुड़ी सामान्य त्रुटियां (जैसे नाम या पिता के नाम की स्पेलिंग में गलती आदि) दूर करने के लिए अब प्रत्येक व्यक्ति से अलग-अलग आवेदन लेने के बजाय ग्राम पंचायत स्तर पर सामूहिक आवेदन लेकर रिकॉर्ड में संशोधन किया जा रहा है।

  • निरंतर सुधार कार्य: प्रशासन का दावा है कि ड्रोन सर्वे के दौरान सामने आई तकनीकी त्रुटियों को लगातार दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द सभी पात्र ग्रामीणों को उनकी संपत्ति की त्रुटिरहित निःशुल्क रजिस्ट्री उपलब्ध कराई जा सके।

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