मध्य प्रदेश न्यूज़: इन-सर्विस डॉक्टरों को ओपन कैटेगरी में दाखिले को चुनौती, जबलपुर हाईकोर्ट ने 2 दिन में मांगा जवाब

मध्य प्रदेश पीजी मेडिकल काउंसलिंग की पहली मेरिट सूची को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और डीएमई को नोटिस जारी कर 2 दिन में जवाब मांगा है।

Nov 03, 2026 - 19:03
0
मध्य प्रदेश न्यूज़: इन-सर्विस डॉक्टरों को ओपन कैटेगरी में दाखिले को चुनौती, जबलपुर हाईकोर्ट ने 2 दिन में मांगा जवाब

मध्य प्रदेश की पोस्ट ग्रेजुएट (PG) मेडिकल काउंसलिंग की पहली मेरिट लिस्ट को लेकर जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान 30 प्रतिशत से अधिक 'इन-सर्विस' (In-Service) उम्मीदवारों को गलत तरीके से प्राथमिकता देकर पीजी मेडिकल में चयन किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन-सर्विस अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी के तहत दाखिला दिया जा रहा है, जिससे सामान्य वर्ग के प्रतिभावान छात्रों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विशाल जैन की युगलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संचालक (मेडिकल एजुकेशन) को नोटिस जारी कर दो दिनों में जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

📋 भोपाल के डॉक्टरों ने दायर की याचिका; प्रथम चरण की काउंसलिंग 10 नवंबर तक रहेगी जारी

याचिकाकर्ताओं का पक्ष और काउंसलिंग शेड्यूल:

  • याचिकाकर्ता: भोपाल निवासी डॉ. जान्हवर बतरा और डॉ. एस. सिंह की ओर से यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है।

  • वर्तमान स्थिति: याचिका में कहा गया है कि संचालक (मेडिकल एजुकेशन) द्वारा पीजी मेडिकल काउंसलिंग की प्रथम मेरिट सूची जारी कर दी गई है और वर्तमान में चयनित छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) किया जा रहा है। प्रथम चरण की यह काउंसलिंग 10 नवंबर तक संचालित होनी है।

  • आरोप: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि प्रथम काउंसलिंग के लिए जारी मेरिट लिस्ट में इन-सर्विस उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में रखा गया है और उन्हें शीर्ष व मनपसंद मेडिकल विभाग आवंटित कर दिए गए हैं।

❓ इन-सर्विस उम्मीदवारों को ओपन कैटेगरी का छात्र क्यों माना? कोटा नियमों का उल्लंघन होने का आरोप

आरक्षण और मेरिट लिस्ट से जुड़ी मुख्य आपत्तियां:

  • 30% आरक्षण की सीमा: याचिका में नियम का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि इन-सर्विस (सरकारी सेवा में कार्यरत) डॉक्टरों के लिए पीजी मेडिकल सीटों में केवल 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

  • ओपन कैटेगरी में एंट्री पर ऐतराज: परीक्षा में इन-सर्विस उम्मीदवार के तौर पर शामिल होने वाले डॉक्टरों को मेरिट सूची तैयार करते समय ओपन कैटेगरी का छात्र मान लिया गया है, जो कि पूरी तरह अनुचित है। ऐसा करने से इन-सर्विस डॉक्टरों का कुल आरक्षण 30 प्रतिशत की तय सीमा से काफी ऊपर चला गया है।

🗓️ वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने रखा पक्ष; 5 नवंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई

अदालती कार्रवाई और आगे का घटनाक्रम:

  • अधिवक्ता की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि इन-सर्विस कोटे से परीक्षा देने वाले डॉक्टरों को किसी भी स्थिति में ओपन कैटेगरी का सामान्य अभ्यर्थी नहीं माना जा सकता।

  • हाईकोर्ट का निर्देश: युगलपीठ ने तर्कों को सुनने के बाद राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को 48 घंटे (दो दिन) के भीतर अपना लिखित रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया है।

  • अगली सुनवाई: जबलपुर हाईकोर्ट ने इस महत्वपूर्ण मामले पर अगली सुनवाई की तिथि 5 नवंबर निर्धारित की है, जिसके बाद पीजी मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया पर बड़ा फैसला आ सकता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User