WGC रिपोर्ट का खुलासा: भारत में सोने में निवेश का मुख्य जरिया बने 'बार और सिक्के', डिजिटल गोल्ड की मांग 76% बढ़ी
WGC की 'इंडिया फोकस' रिपोर्ट के अनुसार सितंबर तिमाही में भारत में सोने का कुल निवेश 60 टन पहुंचा। बार-सिक्के और डिजिटल गोल्ड निवेशकों की पहली पसंद बने।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) द्वारा जारी ‘इंडिया फोकस’ रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष की सितंबर तिमाही में भारत के भीतर सोने में निवेश का सबसे पसंदीदा और प्रमुख माध्यम ‘बार और सिक्के’ (सोने की ईंटें व सिक्के) रहे। इनकी कुल मांग पिछली तिमाही के मुकाबले 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 55 टन के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इसमें 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का मुख्य कारण पिछले वर्ष का उच्च आधार (High Base) और सोने की कीमतों में तेजी की रफ्तार का थोड़ा धीमा पड़ना रहा, जिससे निवेशकों की आक्रामक खरीदारी में नरमी आई।
🛃 आयात शुल्क (Import Duty) और आय में बदलाव का दिखा सीधा असर; वैश्विक बाजार में भारत की 21% हिस्सेदारी
सीमा शुल्क का प्रभाव और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति:
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इम्पोर्ट ड्यूटी का असर: मई महीने में सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) में 9 प्रतिशत अंकों की वृद्धि की गई थी, जिसका सीधा असर घरेलू मांग पर पड़ा।
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आर्थिक मॉडल का निष्कर्ष: WGC के आर्थिक विश्लेषणात्मक मॉडल बताते हैं कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी और निवेशकों की आय में बदलाव से सोने के 'बार और सिक्कों' की मांग काफी हद तक प्रभावित होती है।
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वैश्विक स्थिति: सालाना आधार पर आई गिरावट के बावजूद, भारत वैश्विक स्तर पर बार और सिक्कों की कुल मांग के मामले में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। सितंबर तिमाही में कुल ग्लोबल डिमांड में अकेले भारत की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत रही।
📊 सितंबर तिमाही में कुल सोना निवेश 60 टन पहुंचा; आभूषणों की तुलना में निवेश मांग अधिक मजबूत
निवेश बाजार के रुझान और आंकड़े:
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कुल निवेश मांग: WGC की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में सोने में कुल निवेश मांग पिछली तिमाही की तुलना में 12 फीसदी बढ़कर लगभग 60 टन हो गई।
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मांग का अनुपात: मार्च तिमाही में जहां कुल सोने की मांग में निवेश का हिस्सा 69 फीसदी तक चला गया था, वहीं सितंबर तिमाही में यह घटकर लगभग 42 फीसदी पर आ गया।
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निवेशकों का भरोसा कायम: वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) में सोने की कुल निवेश मांग में पिछले वर्ष के मुकाबले केवल 4 फीसदी की मामूली गिरावट आई, जबकि इसी दौरान आभूषणों (Jewelry) की मांग में 18 फीसदी की बड़ी कमी देखी गई। इससे स्पष्ट होता है कि सोने की ऊंची कीमतों का असर निवेश वाली खरीदारी पर काफी कम पड़ा है।
📉 गोल्ड ETF में निवेशकों की रुचि बरकरार; फंड ऑफ फंड्स (FoFs) पर नए सब्सक्रिप्शन का प्रभाव सीमित
ईटीएफ प्रवाह और बाजार की स्थिति:
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होल्डिंग में बढ़ोतरी: गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में निवेशकों का आकर्षण लगातार बना हुआ है। सितंबर तिमाही में इसकी मांग 3.6 टन से बढ़कर 5.3 टन हो गई, जिससे भारत में कुल ईटीएफ होल्डिंग लगभग 124 टन के स्तर पर पहुंच गई।
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म्यूचुअल फंड्स का फैसला: अक्टूबर के मध्य में म्यूचुअल फंड हाउसों ने 'गोल्ड फंड ऑफ फंड्स' (FoFs) में नए एकमुश्त सब्सक्रिप्शन पर अस्थायी रोक लगाई है। हालांकि, मौजूदा सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) और डायरेक्ट गोल्ड एटीएफ में निवेश पहले की तरह जारी है।
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सीमित असर: चूंकि FoF के तहत प्रबंधित एसेट (AUM) कुल गोल्ड एटीएफ के एसेट का लगभग एक-तिहाई है, इसलिए डायरेक्ट ईटीएफ और मौजूदा एसआईपी चालू रहने से ईटीएफ प्रवाह पर कोई बड़ा विपरीत प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।
📱 डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) की लोकप्रियता में रिकॉर्ड उछाल; 9 महीनों में 76% बढ़ी मांग
स्मार्ट और आधुनिक निवेश तकनीक:
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डिजिटल गोल्ड की मांग: सोने में निवेश का तरीका अब पारंपरिक भौतिक रूप से आगे बढ़कर डिजिटल माध्यमों की ओर तेजी से स्थानांतरित हो रहा है। सितंबर तिमाही में डिजिटल गोल्ड की कुल खरीद लगभग 4.9 टन दर्ज की गई, जो एक साल पहले के 3.4 टन के आंकड़े से काफी अधिक है।
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रिकॉर्ड वृद्धि: वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों में डिजिटल गोल्ड की कुल मांग में 76 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 16.3 टन पर पहुंच गई (जो पिछले साल की इसी अवधि में 9.2 टन थी)।
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बढ़ती लोकप्रियता का कारण: WGC के अनुसार, डिजिटल गोल्ड की आसान उपलब्धता, मोबाइल प्लेटफॉर्म्स के जरिए त्वरित पहुंच, सुरक्षित स्टोरेज और बहुत कम न्यूनतम राशि (Minimum Investment) से निवेश शुरू करने की सुविधा के कारण युवा और नए निवेशक इसकी ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
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