मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर हाई कोर्ट सख्त, जवाब नहीं दिया तो समाप्त हो जाएगा अधिकार
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव मामले में हाई कोर्ट ने निर्वाचित सांसदों को पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया। याचिकाकर्ता मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन निरस्त करने को दी है चुनौती।
मध्य प्रदेश में करीब 5 महीने पहले संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के मामले में कानूनी हलचल तेज हो गई है। हाई कोर्ट ने चुनाव में निर्वाचित हुए सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है। जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा है कि यदि निर्धारित तिथि से पूर्व सांसद अपना जवाब प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो उनका जवाब पेश करने का कानूनी अधिकार समाप्त कर दिया जाएगा। अदालत ने इस महत्वपूर्ण याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
📜 कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की याचिका; नामांकन निरस्त करने के फैसले को दी गई है चुनौती
याचिका के मुख्य बिंदु और आरोप:
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नामांकन रद्द करने का मामला: कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराजन की ओर से राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका नामांकन निरस्त किए जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (Election Petition) दायर की गई है।
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बनाए गए पक्षकार: इस याचिका में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए सांसद तरुण चुग, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवट को आधिकारिक रूप से पक्षकार बनाया गया है।
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तेलंगाना मामले का जिक्र: याचिका में मुख्य रूप से तर्क दिया गया है कि तेलंगाना में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी कथित रूप से छिपाने के आधार पर चुनाव अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था, जबकि तेलंगाना राज्य के जिला न्यायालय द्वारा एक परिवाद की सुनवाई के दौरान उन्हें नोटिस जारी किए गए थे।
⚖️ निर्वाचन अधिकारी व्यक्तिगत रूप से दाखिल करेंगे जवाब; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई सुनवाई
कानूनी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग का पक्ष:
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: याचिकाकर्ता मीनाक्षी नटराजन की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने और कांग्रेस पार्टी ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले को पहले उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में चुनौती दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विधिवत चुनाव याचिका दायर करने के निर्देश दिए थे।
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निर्वाचन आयोग की दलीलें: सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने अदालत को अवगत कराया कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नाम इस प्रकरण से हटाने के लिए एक औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
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व्यक्तिगत जवाब: निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है, और वे अपना व्यक्तिगत जवाब अदालत में दाखिल करेंगे। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के नाम हटाने वाले आवेदन पर अलग से विधिवत आदेश पारित किया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता और अधिवक्ता राजीव मिश्रा ने पक्ष रखा।
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