चंबल नदी के घटते जल प्रवाह पर CEC गंभीर, सुप्रीम कोर्ट से CWC और NIH से संयुक्त अध्ययन कराने की सिफारिश

चंबल अभयारण्य पर सुप्रीम कोर्ट में CEC की रिपोर्ट। केवल खनन रोकना काफी नहीं, जलीय जीवों के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की सिफारिश। पूरी खबर पढ़ें।

Nov 08, 2026 - 11:40
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चंबल नदी के घटते जल प्रवाह पर CEC गंभीर, सुप्रीम कोर्ट से CWC और NIH से संयुक्त अध्ययन कराने की सिफारिश

मुरैना: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध उत्खनन पर अंकुश लगाने और दुर्लभ जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण को लेकर गठित सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने प्रभावित नदी क्षेत्रों का गहन निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में दाखिल कर दी है। मंगलवार को पेश की गई इस रिपोर्ट में सीईसी ने स्पष्ट किया है कि चंबल नदी का समग्र संरक्षण केवल अवैध रेत खनन रोकने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नदी के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए व्यापक कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।

🔬 केंद्रीय जल आयोग (CWC) और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) से संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययन कराने का सुझाव

सिफारिशें और अध्ययन के मुख्य बिंदु:

  • संयुक्त अध्ययन की आवश्यकता: सीईसी ने अपनी सिफारिश में सुझाव दिया है कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) को राज्य सरकार के साथ मिलकर चंबल नदी का एक संयुक्त और व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन (Joint Scientific Study) करना चाहिए।

  • जल प्रवाह का प्रभाव: इस अध्ययन में चंबल नदी के मौसमी (Seasonal) और कम होते जल प्रवाह, पर्यावरणीय जरूरतों (Environmental Flow), तथा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में पानी के अत्यधिक उपयोग का विश्लेषण किया जाएगा।

  • दुर्लभ जलीय जीवों पर नजर: अध्ययन का मुख्य उद्देश्य नदी के जल स्तर और गुणवत्ता में आ रहे बदलावों का घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन, मगरमच्छ, कछुओं सहित अन्य दुर्लभ जलीय जीवों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों का सही आकलन करना है।

🏞️ 'वन्यजीव संरक्षण की कीमत पर न हो पर्यटन का विस्तार'; CEC ने दिया कड़ा संदेश

पर्यटन और संरक्षण का संतुलन:

  • पर्यटन गतिविधियों पर चेतावनी: समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि अभयारण्य क्षेत्रों और नदी तटों पर पर्यटन गतिविधियों (Tourism Activities) का विस्तार किसी भी कीमत पर स्थानीय वन्यजीवों और जलीय जीवों के संरक्षण की बलि देकर नहीं किया जाना चाहिए।

  • पर्यावरण संतुलन सर्वोपरि: पर्यटन से राजस्व कमाने की तुलना में चंबल के अद्वितीय जीव-जंतुओं और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखना प्रशासन और सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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