महामंडलेश्वर नर्सिंग दास और पंडित अशोक शास्त्री ने बताया, त्योहार पर किन बुरी आदतों से मां लक्ष्मी हो जाती हैं नाराज
दीपावली पर जुआ, नशा और फटे कपड़ों के फैशन से दूर रहने की सलाह। धार के संतों और ज्योतिषियों ने बताए पूजा और स्वच्छता के जरूरी नियम। पूरी खबर पढ़ें।
धार: दीपावली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए देश भर के घरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। लेकिन, त्योहार के इस उल्लास के बीच कुछ ऐसी सामाजिक कुरीतियां और बुरी आदतें भी जुड़ गई हैं, जिन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से कतई उचित नहीं माना जाता है। इनमें जुआ खेलना, नशा करना, घर में गंदगी रखना और आपसी विवाद जैसी गतिविधियां शामिल हैं, जो दीपावली की मूल पवित्र भावना को ठेस पहुँचाती हैं। इन सभी कुप्रथाओं और गलत आदतों से बचने के लिए चतुर भुज राम मंदिर के महामंडलेश्वर नर्सिंग दास जी महाराज और प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक शास्त्री ने समाज को एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
🎲 उत्सव के नाम पर जुआ और नशे से रहें पूरी तरह दूर; महामंडलेश्वर ने युवाओं को दी सीख
नशामुक्ति और उत्सव की भावना:
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आनंद और वैभव का पर्व: महामंडलेश्वर नर्सिंग दास जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि दीपावली असल में आंतरिक आनंद, उल्लास और प्रकाश का पर्व है। मां लक्ष्मी का संबंध हमेशा प्रसन्नता, सात्विक आनंद और वैभव से जुड़ा होता है।
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कुरीतियों का त्याग: ऐसे में इस पवित्र पर्व पर जुआ खेलना, ताश खेलना या नशा करने जैसी सामाजिक बुराइयों से हर हाल में बचना चाहिए। इस महान त्योहार को गलत आदतों में उलझाने के बजाय अपने परिवार, मित्रों और समाज के साथ मिलकर खुशियां बांटने का मुख्य माध्यम बनाना चाहिए।
👖 फटे कपड़ों के फैशन और दिखावे से बचें युवा; शालीन पहनावा है भारतीय संस्कृति की पहचान
पहनावे को लेकर चेतावनी:
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विरोधाभासी चलन: महाराज ने आज की युवा पीढ़ी के पहनावे पर चिंता जताते हुए कहा कि आजकल युवाओं में फटे-पुराने कपड़े पहनने का फैशन बहुत बढ़ गया है।
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असंभ्रम की स्थिति: एक तरफ लोग अपने घरों में विधि-विधान से मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ आधुनिकता के नाम पर फटे हुए कपड़े पहनकर त्योहार मनाते हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह विरोधाभासी बताते हुए कहा कि त्योहार के दिन ऐसी भद्दी परंपराओं से बचना चाहिए और हमेशा शालीन तथा स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए।
🧹 घर में दरिद्रता लाने वाली चीजों को करें बाहर; साफ-सफाई और स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान
स्वच्छता और वास्तु के नियम:
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सकारात्मक वातावरण: महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि यदि आप अपने घर में स्थायी रूप से मां लक्ष्मी का वास चाहते हैं, तो दरिद्रता को बढ़ावा देने वाली चीजों और कबाड़ को तुरंत घर से दूर रखना चाहिए। घर और आसपास का वातावरण हमेशा स्वच्छ, व्यवस्थित और सकारात्मक होना चाहिए।
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माता लक्ष्मी का आगमन: ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया कि दीपावली पर कभी भी घर में गंदगी या अव्यवस्था नहीं रखनी चाहिए। घर का मुख्य द्वार, पूजा स्थल और चारों तरफ का परिसर पूरी तरह साफ-सुथरा होना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में स्वच्छता को सीधे तौर पर मां लक्ष्मी के आगमन और उनकी कृपा से जोड़कर देखा जाता है।
🗣️ अपशब्द और बड़ों के अपमान से बचें; मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की है गहरी परंपरा
पूजा-पाठ और पारिवारिक सौहार्द:
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सद्भाव और संयम: पंडित शास्त्री ने आगे बताया कि त्योहार के पावन दिन परिवार में किसी भी प्रकार का विवाद करने, अपशब्द बोलने या घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान करने से सख्त बचना चाहिए।
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जरूरतमंदों की सहायता: किसी भी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को अपने द्वार से निराश लौटने के बजाय अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद करनी चाहिए। लक्ष्मी पूजन के दौरान पूजा सामग्री की शुद्धता का पूरा ध्यान रखना चाहिए। भगवान गणेश के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करते वक्त मन में पूर्ण श्रद्धा रखनी चाहिए।
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मुख्य द्वार का महत्व: पंडित शास्त्री के अनुसार, दीपावली की रात घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की प्राचीन परंपरा है, जिसे मां लक्ष्मी के स्वागत और उनके मार्ग को रोशन करने का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। पूजा सामग्री और दीपकों को हमेशा सम्मानपूर्वक स्थान देना चाहिए, उनका अनादर नहीं करना चाहिए।
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