Indore News: ड्रग्स केस में उलझा पुलिस का 'यूरिया' कांड; आरक्षक लखन गुप्ता ने तत्कालीन अधिकारियों पर दर्ज कराया परिवाद
इंदौर के तेजाजी नगर ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, ड्रग्स निकला यूरिया। आरक्षक लखन गुप्ता ने अधिकारियों पर षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कोर्ट में परिवाद दायर किया।
इंदौर। इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। कभी 'एमडी ड्रग्स' के नाम पर चर्चा में रहा एक पुलिस केस अब 'यूरिया कांड' में बदल गया है। दरअसल, जिस पदार्थ को पुलिस ने ड्रग्स बताकर आरक्षक लखन गुप्ता सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया था, वह फॉरेंसिक जांच में केवल 'यूरिया' निकला। इस फर्जीवाड़े के आरोप में अब आरक्षक लखन गुप्ता ने तत्कालीन डीसीपी, एसीपी और थाना प्रभारी सहित 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद दायर किया है।
⚖️ कोर्ट ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को जारी होगा नोटिस
आरक्षक लखन गुप्ता के अधिवक्ता नितिन पाराशर ने बताया कि उनके मुवक्किल को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया था। इस मामले में तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा, एसीपी करण सिंह, थाना प्रभारी आदित्य सिंघारे और 16 अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है। इंदौर जिला कोर्ट ने परिवाद स्वीकार कर लिया है और अब संबंधित अधिकारियों से इस पूरी कार्रवाई को लेकर जवाब तलब किया जाएगा।
🔍 क्या था पूरा मामला?
तेजाजी नगर पुलिस ने आरक्षक लखन गुप्ता और उनके साथियों को एमडी ड्रग्स तस्करी के आरोप में पकड़ा था। यह मामला मीडिया की सुर्खियों में भी रहा। हालांकि, बाद में लैब रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जब्त सामग्री कोई नशीला पदार्थ नहीं बल्कि यूरिया थी। इसके बाद हाई कोर्ट से राहत मिलने पर लखन गुप्ता ने खुद को निर्दोष बताते हुए अब उन अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिन्होंने बिना जांच के उनके खिलाफ कार्रवाई की थी।
⚠️ आगे की कानूनी राह
कोर्ट अब यह देखेगा कि पुलिस की यह कार्रवाई वाकई एक षड्यंत्र थी या किसी गलतफहमी का परिणाम। यदि कोर्ट अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाबों से संतुष्ट नहीं होता है, तो उन पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकते हैं। यह मामला इंदौर पुलिस विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
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