Burhanpur News: नेपानगर में पोस्टमार्टम हाउस खुद 'बीमार'; खिड़की-दरवाजे टूटे, अपनों के शवों की रखवाली को मजबूर परिजन
बुरहानपुर के नेपानगर में पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति जर्जर। शवों की रखवाली के लिए परिजन और पुलिस मजबूर। स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर को भेजा प्रस्ताव।
बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। एशिया के सबसे बड़े कागज कारखाने 'नेपा लिमिटेड' के लिए विख्यात नेपानगर क्षेत्र में स्थित पोस्टमार्टम रूम (मॉर्च्युरी) खुद बदहाली का शिकार हो गया है। यहाँ न तो दीवारें सुरक्षित हैं और न ही खिड़की-दरवाजे। स्थिति इतनी गंभीर है कि मृतकों के शवों की सुरक्षा के लिए परिजनों और पुलिसकर्मियों को खुद पहरा देना पड़ रहा है।
🐕 आवारा कुत्तों और जंगली जानवरों का डर
पोस्टमार्टम कक्ष के दरवाजे और खिड़कियां टूटकर गिर चुकी हैं, जिससे अंदर रखे शवों को जंगली जानवरों और आवारा कुत्तों से नुकसान पहुंचने का हर पल खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से भवन की यही स्थिति है, लेकिन बार-बार मांग करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी सुध नहीं ली। रात के समय किसी घटना के बाद शव को यहां रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
🗣️ कांग्रेस ने उठाए सवाल, प्रशासन ने दिया आश्वासन
कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी ने इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 'मौत के बाद भी शवों को सम्मान नहीं मिल रहा है।' वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने नए मॉर्च्युरी रूम के निर्माण या मरम्मत का प्रस्ताव कलेक्टर को भेज दिया है। खंडवा-बुरहानपुर के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
🏗️ कलेक्टर का मिला भरोसा
जब इस मामले की जानकारी बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह तक पहुंची, तो उन्होंने भी जर्जर भवन की मरम्मत या नए निर्माण के लिए शीघ्र कार्यवाही का भरोसा दिलाया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक परिजन अपने अपनों के शवों के साथ इस तरह पहरा देंगे? नेपानगर की जनता अब जल्द से जल्द इस अव्यवस्था से मुक्ति चाहती है।
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