Rewa Sundarza Mango Export: रीवा का 'जीआई टैग' सुंदरजा आम पहुँचा यूएई; विदेशी बाजार मिलने से किसानों की बढ़ी आय
रीवा का मशहूर सुंदरजा आम पहली बार यूएई निर्यात। जीआई टैग प्राप्त इस आम की खासियत और निर्यात से किसानों को होने वाले मुनाफे की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा का गौरव और जीआई (GI) टैग प्राप्त 'सुंदरजा आम' अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना चुका है। पहली बार इस खास किस्म के आम की एक खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) निर्यात की गई है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से 1 मीट्रिक टन आम का निर्यात सफल रहा है, जिससे स्थानीय किसानों में खुशी की लहर है।
✈️ कैसे तय हुआ रीवा से दुबई का सफर?
निर्यात की प्रक्रिया के तहत रीवा के गोविंदगढ़ के प्रगतिशील किसान सोनू गुप्ता और विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों से आमों की खरीद की गई। गुणवत्ता की कड़ाई से जांच और छंटाई के बाद इन आमों को उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित एपीडा पैकिंग हाउस भेजा गया, जहाँ अत्याधुनिक तकनीकों से इनकी पैकिंग कर यूएई भेजा गया। यह समन्वय मध्य प्रदेश के उद्यानिकी विभाग की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
💰 किसानों को हुआ मोटा मुनाफा
विदेश में निर्यात होने से किसानों को स्थानीय बाजार के मुकाबले कहीं बेहतर दाम मिले हैं। किसान सोनू गुप्ता के अनुसार, जहां स्थानीय बाजार में यह आम करीब 100 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, वहीं विदेशी बाजार में इसे 150 रुपये प्रति किलो तक के दाम प्राप्त हुए हैं। खाद्य प्रसंस्करण आयुक्त सौरव कुमार सुमन का कहना है कि इस कदम से राज्य के बागवानी और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को एक नई दिशा और वैश्विक मंच मिलेगा।
👑 राजघराने की विरासत और सुंदरजा की खासियत
रीवा राजघराने की देन माना जाने वाला यह आम अपनी मिठास और खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। 1885 में महाराजा रघुराज सिंह ने गोविंदगढ़ में इसकी शुरुआत की थी। इस आम की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद पोषक तत्व और कम शुगर कंटेंट है। इसमें विटामिन-ए, सी और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं, लेकिन चीनी की मात्रा कम होने के कारण यह मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी सुरक्षित और पसंदीदा माना जाता है। भारत सरकार द्वारा इस पर डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)