Anti-Encroachment Action Gwalior: सरकारी जमीन पर बना था अवैध निर्माण; 8 घंटे चली कार्रवाई में तोड़े गए 74 आलीशान मकान
ग्वालियर के नारायण विहार कॉलोनी में हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई। 74 अवैध निर्माणों को प्रशासन ने किया ध्वस्त। कार्रवाई के दौरान मचा भारी हंगामा।
ग्वालियर। हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बाद रविवार को जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने गोला का मंदिर क्षेत्र स्थित नारायण विहार कॉलोनी में बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की। लगभग आठ घंटे तक चले इस अभियान में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए 74 मकानों के हिस्सों को तोड़ दिया गया। अभियान के दौरान प्रशासन ने 4 से 10 फीट तक के अवैध अतिक्रमण को हटाने में सफलता पाई।
⚔️ कार्रवाई में बाधा और धमकी का मामला
अभियान के दौरान उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब एक नशा मुक्ति केंद्र के समीप अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम को एक युवक ने जान से मारने की धमकी दी। हंगामा कर रहे उपद्रवियों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों ने मामला शांत कराया और कार्रवाई जारी रखी। जानकारी के अनुसार, धमकी देने वाले युवक के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
🛣️ औद्योगिक सड़क का हुआ था व्यवसायीकरण
नारायण विहार क्षेत्र कभी औद्योगिक विभाग की 80 फीट चौड़ी सड़क का हिस्सा था, जो सालों के अतिक्रमण के कारण सिमटकर मात्र 25 फीट रह गई थी। स्थानीय निवासियों और याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल की शिकायतों के बाद कोर्ट ने प्रशासन से जवाब मांगा था, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। इस क्षेत्र में कई औद्योगिक इकाइयां, ढाबे और व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थित हैं, जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था।
👮 सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी
कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। एसडीएम लश्कर नरेंद्र बाबू यादव, तहसीलदार मनीष जैन, रमाशंकर सिंह और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ नगर निगम के मदाखलत अमले ने संयुक्त रूप से यह कार्य संपन्न किया। प्रशासन द्वारा सभी 74 अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस जारी कर सूचना दी जा चुकी थी, जिसके चलते भारी मशीनरी के साथ पहुंची टीम को देखकर लोग सहमे हुए थे।
📝 प्रमुख अतिक्रमणकारियों की सूची
प्रशासन द्वारा जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, उनमें तक्षशिला इंडस्ट्रीज, ओम पब्लिक स्कूल, विभिन्न ढाबा संचालक और स्थानीय निवासी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई हाईकोर्ट में पेश किए जाने वाले पालन प्रतिवेदन का हिस्सा है। अवैध कब्जों को लेकर सालों से शिकायतें लंबित थीं, जिस पर अब प्रशासन ने पूर्णतः विराम लगाने का काम किया है।
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