जेडी की कुर्सी के लिए मचा घमासान; एक ही पद पर दो दावेदार, कार्यालय में मचा हंगामा

ग्वालियर शिक्षा कार्यालय में संयुक्त संचालक पद को लेकर विवाद। पूर्व जेडी कोर्ट का स्थगन आदेश लेकर पहुंचे, तो वर्तमान जेडी ने पद छोड़ने से किया इनकार।

Jul 03, 2026 - 10:19
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जेडी की कुर्सी के लिए मचा घमासान; एक ही पद पर दो दावेदार, कार्यालय में मचा हंगामा

ग्वालियर। शिक्षा कार्यालय में गुरुवार को उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई जब एक ही पद (संयुक्त संचालक शिक्षा) के लिए दो अधिकारियों ने अपना दावा ठोक दिया। विवाद की शुरुआत तब हुई जब 25 जून को लोक शिक्षण विभाग ने पूर्व संयुक्त संचालक अरविंद सिंह का तबादला भोपाल कर दिया और उनकी जगह सहायक संचालक हरिओम चतुर्वेदी को प्रभार सौंप दिया। हरिओम चतुर्वेदी ने पदभार ग्रहण कर लिया था, लेकिन गुरुवार को अरविंद सिंह कोर्ट का स्थगन आदेश लेकर कार्यालय पहुँचे और कुर्सी पर अपना हक जताने लगे।

⚖️ तकनीकी पेंच: कोर्ट का आदेश बनाम शासन की प्रक्रिया

अरविंद सिंह का तर्क है कि कोर्ट ने 30 जून के आदेश में उन्हें अनुमति देने के लिए कहा है। हालांकि, हरिओम चतुर्वेदी का कहना है कि सचिव या शासन स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। चतुर्वेदी का तर्क है कि अरविंद सिंह को पहले भोपाल में रिपोर्ट कर कोर्ट का आदेश प्रस्तुत करना चाहिए था, न कि सीधे स्थानीय कार्यालय में आकर पदभार ग्रहण करना चाहिए था। बिना शासन के आदेश के पद छोड़ने से उन्होंने स्पष्ट इनकार कर दिया है।

⚠️ प्रशासन के निर्णय पर टिकीं निगाहें

वर्तमान में कार्यालय में स्थिति असमंजस वाली बनी हुई है। हरिओम चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि उन्हें शासन द्वारा विधिवत नियुक्त किया गया है और वे तब तक अपना कार्य नहीं छोड़ेंगे जब तक शासन से उन्हें लिखित निर्देश नहीं मिलते। वहीं, पूर्व जेडी अरविंद सिंह द्वारा सीधे आवक-जावक शाखा में ज्वाइनिंग दिए जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। फिलहाल, सभी की निगाहें शासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

🔍 पद की गरिमा और कार्यालयीन व्यवस्था

इस विवाद के चलते शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ने की संभावना है। जहाँ एक ओर प्रशासनिक प्रक्रिया और कोर्ट के आदेशों के बीच सामंजस्य बैठाना चुनौती बना हुआ है, वहीं विभाग के कर्मचारी भी इस द्वंद्व के कारण संशय में हैं। अरविंद सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग का शीर्ष नेतृत्व इस 'कुर्सी विवाद' को कैसे सुलझाता है।

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