गौ-तस्करी मामले में उम्रकैद सुनाने वाली जज को मिली धमकी; हाई कोर्ट ने कहा- न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जज तबस्सुम खान को मिल रही धमकियों पर लिया स्वतः संज्ञान। गौ-तस्करी मामले में फैसला सुनाने पर दी गई थी धमकी। सरकार को दिया निर्देश।
जबलपुर। सिवनी मालवा में तैनात महिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को मिल रही धमकियों के मामले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। गौ-तस्करी और मॉब लिंचिंग मामले में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां और कथित धमकी भरे संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने इस घटनाक्रम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बाधा माना है।
🛡️ सुरक्षा और न्यायिक स्वायत्तता का मुद्दा
हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी को उनके द्वारा सुनाए गए फैसले के लिए धमकाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युगलपीठ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त मुख्य सचिव से 3 दिन के भीतर हलफनामा तलब किया है। अदालत ने नर्मदापुरम पुलिस अधीक्षक से यह जवाब मांगा है कि जज की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उपद्रवियों पर नकेल कसने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
🔍 क्या है पूरा विवाद?
मामला 12 जून 2026 का है, जब न्यायाधीश तबस्सुम खान ने गौ-हत्या से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में 14 आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फैसले के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वर्ग विशेष द्वारा जज के विरुद्ध दुष्प्रचार शुरू कर दिया गया, जिससे न्यायिक जगत में चिंता का माहौल है। हाई कोर्ट ने इस स्थिति को 'डर का माहौल' बताते हुए इसे न्यायिक कार्यों में बाधा करार दिया है।
⏳ अगली सुनवाई 9 जुलाई को
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि वे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत का यह रुख यह दर्शाता है कि कानून अपना काम निष्पक्ष रूप से करेगा और न्याय के मंदिर में फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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