जहरीला पानी और बदबूदार हवा; आदमपुर कचरे के पहाड़ से प्रभावित ग्रामीण, निगम के टैंकरों पर निर्भर
भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में 7 लाख टन कचरे का पहाड़। दूषित पानी और जहरीले धुएं से 10 गांवों का जीवन प्रभावित।
भोपाल। राजधानी भोपाल के कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के लिए बनाई गई आदमपुर कचरा खंती अब आसपास के 10 गांवों के लिए गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट बन चुकी है। यहाँ कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होने के बजाय 7 लाख टन का एक विशाल पहाड़ खड़ा हो गया है। इस कचरे से निकलने वाला जहरीला तरल (लीचेट) भूजल में मिलकर उसे पूरी तरह दूषित कर चुका है, जिसके कारण इन गांवों में हैंडपंप और कुओं का पानी पीने के योग्य नहीं रहा।
💧 पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर ग्रामीण
पेयजल की समस्या इतनी विकराल है कि नगर निगम को हरिपुरा, अर्जुन नगर, पड़रिया, शांति नगर और कोलुआ जैसे गांवों में टैंकरों और सार्वजनिक टंकियों के माध्यम से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि 100 परिवारों के लिए 10,000 लीटर की एक टंकी पर्याप्त नहीं है और आपूर्ति भी अनियमित है। हैंडपंपों से काला पड़ चुका पानी निकल रहा है, जिसे वे घरेलू कार्यों के लिए भी उपयोग नहीं कर सकते।
😷 स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा और प्रदूषण
कचरे के पहाड़ में अक्सर लगने वाली आग और उससे उठने वाला धुआं क्षेत्र में अस्थमा, एलर्जी, गले में खराश और सांस लेने की गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि कचरे का निस्तारण कर भी दिया जाए, तब भी भूजल को प्राकृतिक रूप से सामान्य होने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं। साथ ही, इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली सब्जियां और अनाज भी दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरा बने हुए हैं, जो सीधे राजधानी की मंडियों में पहुँच रहे हैं।
🏢 नगर निगम का पक्ष
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि वे प्रभावित गांवों में नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं। निगम का दावा है कि उनका निरंतर प्रयास है कि जल्द से जल्द कचरा खंती के कचरे को समाप्त कर क्षेत्र को इस समस्या से मुक्त किया जा सके।
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