अस्पताल बना नहीं, फिर भी नियुक्त हैं 35 स्वास्थ्य कर्मी; जानें क्या है खजराना सिविल अस्पताल का सच
इंदौर के खजराना में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय अस्पताल निर्माण में देरी। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया और स्टाफ की वर्तमान स्थिति पर जिला प्रशासन ने दी जानकारी।
इंदौर। शहर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि अस्पताल निर्माण में विलंब का मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग को आवंटित भूमि का वास्तविक हस्तांतरण न हो पाना है। आवंटित 0.700 हेक्टेयर भूमि पर वर्तमान में नगर निगम का कब्जा है। कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इस भूमि का कब्जा हटवाकर स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जाएगा, जिसके बाद भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू होगी।
🏥 स्टाफ की स्थिति: अस्पताल नहीं, फिर भी कार्यरत हैं कर्मचारी
प्रशासन ने यह भी साफ किया कि वर्तमान में अस्पताल भवन अस्तित्व में न होने के बावजूद, वर्ष 2021 में स्वीकृत 87 पदों में से 35 कर्मचारियों (29 स्टाफ नर्स, 5 फार्मासिस्ट और 1 लैब टेक्नीशियन) की नियुक्ति हो चुकी है। स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को देखते हुए इन कर्मचारियों को शहर की अन्य शासकीय संस्थाओं में पदस्थ किया गया है, जहाँ वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें नियमानुसार वेतन का भुगतान किया जा रहा है।
📢 स्पष्टीकरण: अभी तक नहीं मिली निर्माण की स्वीकृति
कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अस्पताल भवन निर्माण के लिए कोई भी प्रशासकीय स्वीकृति संबंधी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल के नाम पर अभी तक किसी प्रकार की दवाओं या उपकरणों की खरीदी नहीं की गई है। खजराना सिविल अस्पताल के लिए अब तक किसी भी चिकित्सक की पदस्थापना के आदेश जारी नहीं हुए हैं।
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