7 मंजिला बिल्डिंग तैयार, पर नहीं मिल रहे उपकरण; छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज पर संकट

छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज (SIMS) की मशीनें युद्ध के कारण अटकीं। 7 मंजिला बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद उपकरण नहीं। छात्रों और मरीजों को हो रही भारी परेशानी।

Jul 10, 2026 - 18:58
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7 मंजिला बिल्डिंग तैयार, पर नहीं मिल रहे उपकरण; छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज पर संकट

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (SIMS) की 7 मंजिला भव्य बिल्डिंग बनकर लगभग तैयार है, लेकिन इसे मरीजों की सेवा में समर्पित करने का इंतजार और बढ़ गया है। मेडिकल कॉलेज के लिए यूनाइटेड किंगडम से आने वाले जरूरी उपकरण और मशीनें अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अटक गई हैं। इन मशीनों के बिना अस्पताल का संचालन शुरू करना संभव नहीं है, जिससे अब प्रोजेक्ट के पूरा होने में देरी तय मानी जा रही है।

🚧 छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज पर संकट

फिलहाल मेडिकल कॉलेज की ओपीडी जिला अस्पताल में संचालित हो रही है, जिससे छात्रों को प्रैक्टिकल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अभय सिंह ने बताया कि छात्रों की पढ़ाई सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला अस्पताल को अनुबंधित किया गया है, लेकिन उपकरणों के अभाव में उनकी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रभावित हो रही है। यदि युद्ध की स्थिति के कारण उपकरण आने में और देरी होती है, तो यह वर्ष भी मरीजों और छात्रों के लिए संघर्षपूर्ण रहने की संभावना है।

📉 कटौती का दंश: सुपर स्पेशियलिटी से 'नॉर्मल अस्पताल' बना सिम्स

परियोजना की शुरुआत 2019 में 455 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी। बीच में प्रोजेक्ट डी-स्कोप होने और विभिन्न प्रशासनिक फेरबदल के कारण इसका स्वरूप बदल गया है। अब यह कॉलेज अपनी मूल परिकल्पना से थोड़ा हटकर एक बड़ी इमारत वाला अस्पताल बनकर रह गया है। इसमें ब्रेन, कैंसर और कार्डियक जैसी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं की कटौती कर दी गई है। इसके चलते इन गंभीर रोगों के मरीजों को आज भी इलाज के लिए नागपुर या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है।

🛠️ दिसंबर तक का है लक्ष्य: शेष काम जारी

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री संतोष ठाकुर के अनुसार, बिल्डिंग का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन मशीनों के इंस्टॉलेशन के अलावा फिनिशिंग, गार्डन और पार्किंग का काम अभी बाकी है। साथ ही, 33 केवी सब-स्टेशन के लिए रेलवे से अनुमति मिलने में भी देरी हो रही है। सप्लायर अब दूसरे वैकल्पिक रास्ते से मशीनें मंगाने की तैयारी कर रहे हैं। इन सभी चुनौतियों को देखते हुए सिम्स के पूरी तरह से तैयार होने में दिसंबर तक का समय लग सकता है।

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