मल्हारराव होलकर से 1961 तक; इंदौर के व्यापारिक इतिहास के अनसुने आंकड़े
जानिए इंदौर का औद्योगिक इतिहास। 1733 में टकसाल की स्थापना से लेकर 1961 की जनगणना तक, शहर के व्यापार और आजीविका के बदलते स्वरूप की पूरी रिपोर्ट।
इंदौर। औद्योगिक जगत में अपनी विशेष पहचान रखने वाले इंदौर का सफर काफी गौरवशाली रहा है। शहर के आर्थिक इतिहास में वर्ष 1733 मील का पत्थर साबित हुआ, जब सूबेदार मल्हारराव होलकर ने शहर में टकसाल (Mint) की स्थापना कर उद्योग जगत की नींव रखी। माता अहिल्याबाई होलकर के कार्यकाल में कंपेल तहसील का नाम बदलकर इंदौर तहसील किया गया और इसे मुख्यालय बनाया गया। समय-समय पर राजधानी में हुए बदलावों के बाद, 1918 की संधि के तहत इंदौर पुनः होलकर साम्राज्य की राजधानी बना।
📊 जनगणना 1961: अर्थव्यवस्था का आईना
इतिहास अध्येता सुनील गणेश मतकर के शोध के अनुसार, 1951 और 1961 की जनगणनाओं के तुलनात्मक अध्ययन से शहर के विविध व्यवसायों की स्थिति स्पष्ट होती है। 1961 के आंकड़ों के अनुसार, शहर में खाद्य सामग्री का थोक व्यापार करने वालों की संख्या 713 थी, जबकि फुटकर व्यवसायियों की संख्या 11,503 थी। 1951 में जहां जिले में 459 साहूकार थे, वहीं 1961 तक यह संख्या घटकर मात्र 90 रह गई, जो बदलती आर्थिक नीतियों का संकेत थी।
🛠️ आजीविका के विभिन्न स्रोत और सेवा क्षेत्र
1961 के आंकड़ों के अनुसार, इंदौर के सेवा क्षेत्र में भी बड़ी विविधता थी:
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परिवहन और घरेलू सेवाएं: चौकीदार, रसोइए व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या 2,114 थी, जबकि मोटर व साइकिल चालकों की संख्या 2,152 थी।
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वस्त्र और दर्जी व्यवसाय: शहर में 3,911 दर्जी, 1,947 धोबी और 19 ड्राईक्लीनिग की दुकानें थीं।
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केश प्रसाधन: हेयर ड्रेसिंग व शृंगार प्रसाधन के क्षेत्र में 1,471 लोग कार्यरत थे।
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होटल और मरम्मत: रेस्टोरेंट व आवास व्यवस्था से जुड़े 1,476 लोग थे, जबकि साइकिल मरम्मत करने वाले व्यवसायियों की संख्या 1,447 थी।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि इंदौर न केवल एक व्यापारिक केंद्र था, बल्कि सेवा क्षेत्र (Service Sector) के विकास के मामले में भी काफी प्रगतिशील था। आज भी यह ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य शहर की औद्योगिक संस्कृति की जड़ों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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