अब दिन में मिलेगी बिजली और डेयरी उद्योग के लिए ₹10 लाख की सब्सिडी; जानें मोहन सरकार का पूरा प्लान

मप्र सरकार ने किसानों को कृषि लोन चुकाने की 31 मार्च की बाध्यता से बड़ी राहत दी है। इंदौर में सीएम मोहन यादव ने दिन में बिजली और डेयरी सब्सिडी की भी घोषणा की है।

Jul 16, 2026 - 10:31
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अब दिन में मिलेगी बिजली और डेयरी उद्योग के लिए ₹10 लाख की सब्सिडी; जानें मोहन सरकार का पूरा प्लान

इंदौर। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से एक बहुत ही राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। मोहन सरकार ने हर साल 31 मार्च तक कृषि लोन (कर्ज) की राशि अनिवार्य रूप से जमा करने की पुरानी बाध्यता को पूरी तरह खत्म करने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इंदौर में आयोजित 'बलराम कृषि महोत्सव' के भव्य शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस ऐतिहासिक निर्णय की औपचारिक घोषणा की। सरकार के इस कदम से प्रदेश के उन लाखों किसानों को सीधा फायदा होगा जो शून्य प्रतिशत (0%) ब्याज दर पर अल्पकालीन कृषि ऋण लेते हैं। अब समय सीमा बढ़ने के कारण किसान समय पर भुगतान न कर पाने की स्थिति में 'डिफॉल्टर' होने के कलंक और कानूनी पेचीदगियों से सुरक्षित बच सकेंगे।

🗓️ 16 विभाग मिलकर मनाएंगे 'किसान कल्याण वर्ष': अब 6 महीने में खाता पलटाने का झंझट खत्म, पूरे 1 साल की मिलेगी मोहलत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित हजारों किसानों को संबोधित करते हुए कहा, "हमारी राज्य सरकार ने इसी वर्ष यह किसान-हितैषी निर्णय लिया है कि अब किसानों को हर 6-6 महीने में बैंकों के चक्कर काटकर अपना खाता पलटाने (लोन रिन्यू कराने) की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि कोई किसान अपनी फसल के लिए जून के महीने में ऋण लेता है, तो उसे अगले साल जून में ही वह पैसा जमा करना होगा। अब किसानों को मार्च क्लोजिंग का कोई भी फालतू झंझट पालने की जरूरत नहीं है।"

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 'किसान कल्याण वर्ष' मनाने की घोषणा की। इसके लिए सरकार ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग और एमएसएमई (MSME) लघु कुटीर उद्योग विभाग सहित कुल 16 अलग-अलग सरकारी विभागों को एक साथ जोड़कर एक मेगा यूनिट (संयुक्त इकाई) तैयार की है, ताकि किसानों को सीधे तौर पर एकीकृत सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने आगे कहा, "मध्य प्रदेश प्राचीन काल से ही नदियों का मायका रहा है। यहां करीब 250 से अधिक छोटी-बड़ी नदियां अलग-अलग क्षेत्रों से निकलकर पूरे प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों को भी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।"

🌊 नर्मदा मैया का आशीर्वाद: इंदौर में बढ़ा सिंचाई का रकबा, PKC योजना से 13 जिलों को जल्द मिलेगा पानी

इंदौर के विकास को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "इंदौर आज अगर देश के नक्शे पर इतनी तेजी से आगे बढ़ा है, तो उसमें सबसे बड़ा योगदान मालवा की जीवनदायिनी मां नर्मदा का आशीर्वाद है। साल 2002-03 तक प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो पाती थी, लेकिन हमारी सरकार के पिछले ढाई साल के विकासोन्मुख कार्यकाल में सिंचाई का कुल रकबा बढ़कर 10 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य देने के लिए इस साल गेहूं को ₹2,625 प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया है।" सरकार का दावा है कि 'भावांतर भुगतान योजना' के बलबूते अतीत में भी किसानों को फसलों के नुकसान की पूरी भरपाई की गई है और आगे भी किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

⚡ दिन में मिलेगी बिजली और डेयरी पर ₹10 लाख सब्सिडी: किसानों और पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री के बड़े वादे

किसानों के लिए दूरगामी योजनाओं का जिक्र करते हुए सीएम मोहन यादव ने एक बड़ा वादा किया कि अब किसानों को भीषण ठंड या रात के अंधेरे में खेतों में पानी देने की समस्या से मुक्ति दिलाई जाएगी। सरकार गर्मी की फसलों की सिंचाई के लिए विशेष रूप से दिन के समय पर्याप्त बिजली की निर्बाध आपूर्ति करेगी, जिससे रात के समय बिजली संकट और खेतों में जाने का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने कहा, "अभी हमारे राज्य की देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 12% हिस्सेदारी है, जिसे हम आगामी वर्षों में बढ़ाकर 20% तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। जो भी युवा या किसान आधुनिक डेयरी उद्योग स्थापित करना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ₹40 लाख की लागत वाली डेयरी परियोजना पर पूरे ₹10 लाख की भारी सब्सिडी (वित्तीय सहायता) प्रदान करेगी।" इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों की समस्या का अनोखा समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि अब नीलगायों को आधुनिक तकनीकों और हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित पकड़कर सुदूर वन्यजीव अभ्यारण्यों में छोड़ा जाएगा, ताकि किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।

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