एमपी में 50 साल पुराने श्रम कानून होंगे खत्म; रात में ड्यूटी करने पर मिलेगी डेढ़ गुना ज्यादा सैलरी

मध्य प्रदेश में 50 साल पुराने 5 श्रम कानून होंगे खत्म। मोहन सरकार लाएगी नया 'वर्कस्पेस विधेयक 2026', रात में काम करने पर मिलेगी डेढ़ गुना ज्यादा सैलरी।

Jul 17, 2026 - 19:49
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एमपी में 50 साल पुराने श्रम कानून होंगे खत्म; रात में ड्यूटी करने पर मिलेगी डेढ़ गुना ज्यादा सैलरी

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और औद्योगिक जगत को बड़ी राहत देने के लिए पांच दशक (50 साल) पुराने पांच जटिल श्रम कानूनों को पूरी तरह खत्म करने जा रही है. राज्य सरकार इन पुराने कानूनों के स्थान पर एक नया और आधुनिक 'एमपी कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कस्पेस 2026' विधेयक लाने की तैयारी कर चुकी है. 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में इस ऐतिहासिक संशोधन विधेयक को पटल पर पेश किया जाएगा. इस विधेयक के माध्यम से राज्य सरकार पहली बार गिग वर्कर्स (Gig Workers) को सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य सुविधा देने जा रही है. इसके अतिरिक्त, इस विधेयक में रात की पाली (Night Shift) में काम करने वाले महिला और पुरुष कर्मचारियों को दिन के मुकाबले अधिक वेतन देने का भी एक क्रांतिकारी प्रावधान किया जा रहा है.

🌙 2. रात में ड्यूटी तो मिलेगी डेढ़ गुना ज्यादा सैलरी: नए कोड में कर्मचारियों के लिए बड़ा प्रावधान

मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में रात की पाली में महिलाओं और पुरुषों के काम करने की व्यवस्था को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए नियमों में पहले ही कई महत्वपूर्ण संशोधन कर चुकी है. इसके तहत यह अनिवार्य प्रावधान किया गया है कि रात में काम पर आने वाले महिला और पुरुष कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके घर से आने-जाने (परिवहन) के लिए कंपनियों को पुख्ता व्यवस्था करनी होगी.

सैलरी का नया ग्रेविटी फॉर्मूला:

अब इस नए संशोधन विधेयक के जरिए रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में भी बड़ी बढ़ोतरी का प्रावधान किया जा रहा है. नए ड्राफ्ट कोड के मुताबिक, दिन के मुकाबले रात में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी को ज्यादा मानदेय दिया जाएगा. नए नियमों के तहत रात की एक घंटे की ड्यूटी को दिन की डेढ़ (1.5) घंटे की ड्यूटी के बराबर माना जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई कर्मचारी रात में 6 घंटे की ड्यूटी करता है, तो नियोक्ता (Employer) को उसे दिन के 9 घंटे की ड्यूटी के बराबर की सैलरी देनी होगी.

🎬 3. रेस्टोरेंट और सिनेमा हॉल 24 घंटे खोलने पर विचार: गिग वर्कर्स को भी मिलेगा कानूनी सुरक्षा कवच

आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस नए संशोधन विधेयक में रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल और अन्य प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे (दिन-रात) खुला रखने की अनुमति देने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. इसी तरह, रेलवे स्टेशनों और बस टर्मिनलों के आसपास की दुकानों व व्यावसायिक केंद्रों को भी रात में एक निर्धारित समय पर बंद करने की प्रशासनिक बाध्यता से पूरी तरह छूट दी जा सकती है.

  • गिग वर्कर्स को कानूनी दायरा: इस संशोधन विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़कर सामान व सेवाओं की डिलीवरी करने वाले 'गिग वर्कर्स' को लेकर किया गया है. इन्हें भी अब श्रम कानून के दायरे में लाया जाएगा, जिससे इन युवाओं को मजबूत कानूनी और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी.

  • कंपनियों के लिए अनिवार्य नियम: कानून लागू होने के बाद सभी संबंधित कंपनियों को अपने आधिकारिक पोर्टल पर स्पष्ट रूप से यह जानकारी सार्वजनिक करनी होगी कि वे इन कर्मचारियों से जुड़े कल्याणकारी नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं.

🏢 4. व्यापारियों और नियोक्ताओं को भी मिलेगी बड़ी राहत: बार-बार रजिस्ट्रेशन के झंझट से मुक्ति

नए 'वर्कस्पेस कोड 2026' के तहत केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि व्यापारियों और नियोक्ताओं को भी इंस्पेक्टर राज और प्रशासनिक जटिलताओं से बड़ी राहत दी जा रही है:

सुधार का क्षेत्र (Ease of Business) नए नियम और प्रावधान
पंजीकरण प्रक्रिया (Registration) बार-बार रिन्यूअल के स्थान पर संस्थानों को केवल एक बार (Lifetime) रजिस्ट्रेशन कराना होगा.
पहचान प्रणाली (Unique ID) हर व्यापारिक संस्थान को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाएगा, जिसमें संस्थान का पूरा विवरण दर्ज होगा.
प्रशासनिक ढील (Compliance) कागजी कमी या छोटी-मोटी लिपिकीय त्रुटियों के लिए सीधे दंडात्मक कार्रवाई के स्थान पर सुधार का मौका मिलेगा.
जुर्माना और सजा (Penalties) सामान्य गलतियों के लिए केवल वित्तीय जुर्माने का प्रावधान होगा, लेकिन गंभीर लापरवाही या सुरक्षा से खिलवाड़ के मामलों में सजा को बेहद कड़ा किया जाएगा.

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